Darbhanga Religious News: दरभंगा में मलमास के अंतिम दिन ब्रह्मपुर पश्चिमी पंचायत स्थित ऐतिहासिक गौतम कुंड आस्था का केंद्र बन गया। सोमवार को सुबह से ही हजारों श्रद्धालु पवित्र कुंड में डुबकी लगाने और पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचने लगे। दिन चढ़ने के साथ ही भक्तों की संख्या में लगातार वृद्धि होती गई, जिससे पूरे इलाके में भक्ति और उत्साह का माहौल छा गया।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
मलमास में गौतम कुंड का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास के दौरान गौतम कुंड में स्नान और दान-पुण्य का अत्यंत विशेष महत्व माना जाता है। इसी आस्था और विश्वास के साथ दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। भक्तों का मानना है कि इस पवित्र कुंड में डुबकी लगाने से सभी पाप धुल जाते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

यह मान्यता सदियों से चली आ रही है, जो इस स्थान को और भी पूजनीय बनाती है। इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना अधिक मिलता है, खासकर पवित्र नदियों या कुंडों में स्नान करने का। गौतम कुंड जैसे पौराणिक स्थल पर ऐसे अवसर पर स्नान करना श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा पुण्य कार्य होता है, जिससे आत्मिक शांति और आध्यात्मिक लाभ की प्राप्ति होती है।
मलमास, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार लगभग हर तीसरे वर्ष आता है। इस पूरे महीने को भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दौरान किए गए जप, तप, दान और स्नान का अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। इसी कारण लाखों श्रद्धालु मलमास के समापन पर विशेष रूप से पवित्र स्थलों पर पहुंचते हैं। गौतम कुंड का उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को और भी पुष्ट करता है। यहां स्नान करने से रोग-दोष दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है, ऐसी प्रबल लोकमान्यता है।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ और व्यवस्था
मलमास के आखिरी सोमवार को ब्रह्मपुर पश्चिमी पंचायत स्थित गौतम कुंड परिसर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। अहले सुबह से ही लोग अपने परिवार के साथ कुंड पर पहुंचने लगे और पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पास के मंदिरों में जाकर देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। भगवान शिव और विष्णु के मंदिरों में विशेष आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया। कई भक्तों ने अपनी श्रद्धा अनुसार वस्त्र, अन्न और धन का दान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आयोजकों द्वारा उचित व्यवस्था की गई थी। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे। आपातकालीन सेवाओं के साथ-साथ चिकित्सा दल भी तैनात किए गए थे ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। स्वयंसेवकों की टीम ने भी श्रद्धालुओं की सहायता के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूरे दिन गौतम कुंड परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में जयकारों और भजनों की गूंज सुनाई देती रही, जिससे वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। यह नजारा देखने लायक था, जहां हर उम्र के लोग अपनी आस्था में लीन दिखे और एक-दूसरे को ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ कहते हुए आगे बढ़ रहे थे।
इस विशाल धार्मिक आयोजन ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि दूर-दराज से आए भक्तों को भी एक साथ जोड़ दिया। कुंड के चारों ओर मेले जैसा माहौल था, जहां प्रसाद और पूजा सामग्री की दुकानें सजी हुई थीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस पवित्र अवसर का हिस्सा बनकर आनंदित महसूस कर रहा था। इस दौरान सामाजिक सौहार्द और सामुदायिक भावना का अद्भुत संगम देखने को मिला, जो ऐसे आयोजनों की पहचान है।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
मलमास की समाप्ति के साथ ही श्रद्धालुओं ने भगवान से अपने और अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। इस अवसर पर अर्जित पुण्य लाभ को लेकर भक्तों के चेहरों पर संतोष और शांति का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था। यह दिन दरभंगा के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन का साक्षी बना, जिसने भक्ति और आस्था की एक नई मिसाल पेश की।








You must be logged in to post a comment.