Darbhanga Dalit News: दरभंगा में दलित समाज पर बढ़ते अत्याचार और उत्पीड़न के खिलाफ एक बड़ा जन आक्रोश देखने को मिला है। दलित चेतना मंच ने लहेरियासराय स्थित प्रेक्षा गृह में एक विशाल महासम्मेलन का आयोजन किया, जहां समाज के विभिन्न वर्गों से आए लोगों ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दलितों के अधिकारों, सम्मान और न्याय के लिए संघर्ष को मजबूत करना था, जो बिहार में लगातार बढ़ रही घटनाओं के मद्देनजर और भी आवश्यक हो गया है।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
दलित चेतना मंच: सशक्त आवाज और जनविश्वास
यह विशाल जन आक्रोश महासम्मेलन दलित चेतना मंच के आठवें स्थापना दिवस के अवसर पर 14 जून 2026 को आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष अशोक पासवान ने की, जबकि मंच संचालन का दायित्व कोषाध्यक्ष दिलीप पासवान ने बखूबी संभाला। इस महत्वपूर्ण आयोजन में बिहार में दलितों के खिलाफ लगातार हो रही हत्याओं, उत्पीड़न और सामाजिक अन्याय जैसे गंभीर मुद्दों पर गहन चर्चा की गई, जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
महासम्मेलन में दलित चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार पासवान, जिन्हें प्यार से ‘गुरुजी’ कहा जाता है, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने प्रेरणादायक संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि दलित चेतना मंच मिथिलांचल क्षेत्र में गरीब, शोषित, वंचित और उत्पीड़ित समाज की एक सशक्त आवाज के रूप में तेजी से उभर रहा है, जिससे लोगों में नई उम्मीद जगी है।गुरुजी ने बताया कि दलित चेतना मंच बिहार के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है और संगठन समाज के हर वर्ग के अधिकार, सम्मान और न्याय के लिए पूरी शक्ति और समर्पण के साथ लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह संगठन केवल आंदोलनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सुख-दुख में उनके साथ खड़ा होकर हर संभव सहायता प्रदान करता है और उनकी समस्याओं को प्रशासन एवं सरकार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य भी करता है।
पाखंडवाद त्यागने और एकजुटता का आह्वान
राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरुजी ने बिहार में दलित उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि इन जघन्य अपराधों के दोषियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके और पीड़ितों को राहत मिल सके। इस मांग ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. ओम सुधा ने समाज से पाखंडवाद और अंधविश्वास को त्यागने का पुरजोर आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में यह अत्यंत आवश्यक है कि समाज उन लोगों का सहयोग और समर्थन करे, जो उनके अधिकारों और सम्मान की लड़ाई पूरी निष्ठा और साहस के साथ लड़ रहे हैं। यह एकजुटता ही समाज को आगे बढ़ा सकती है।डॉ. सुधा ने गुरुजी जैसे जुझारू नेतृत्वकर्ताओं की सराहना की, जो प्रशासन के सामने भी समाज की समस्याओं को पूरी मजबूती और निडरता से उठाते हैं। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे इस संघर्ष में अपनी सक्रिय और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि दलित समाज को उसका वाजिब हक और सम्मान मिल सके। यह आह्वान एक बड़े बदलाव का संकेत था।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
न्याय और सम्मान के लिए संघर्ष जारी रहेगा
इस विशाल जन आक्रोश महासम्मेलन में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा और महिलाएं शामिल हुईं, जो समाज के हर कोने से आए थे। सभी ने दलित समाज के अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का दृढ़ संकल्प लिया। यह आयोजन समाज में एक नई चेतना लाने और एक मजबूत आंदोलन की नींव रखने में अत्यंत सफल रहा।कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं, जिनमें इंजीनियर हेमंत पासवान, निरंजन पासवान, सनी रजक, अमर आजाद, चंदन पासवान, प्रमोद पासवान, राज नारायण पासवान, जयमाला देवी, गुंजन कुमारी, सुमन पासवान, विद्यानंद राम, रामप्रीत राम, प्रवेश सदा, विक्की मलिक, दिलीप रजक, विनय विक्रांत पासवान, नागेश्वर पासवान, मुखिया धर्मेंद्र पासवान, विजय पासवान, विश्व महतो, मनोज कुमार दास, रिंकू देवी, राधेश्याम पासवान, आलोक देवराज, सुभाष लखन, विशाल आनंद पासवान, अशोक नायक, मोहम्मद अख्तर, सरोज पासवान, पिंकी पासवान, रामसागर पासवान और आकाश पासवान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग शामिल थे।इन सभी गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने दलित चेतना मंच के उद्देश्यों को और अधिक बल प्रदान किया। महासम्मेलन ने स्पष्ट संदेश दिया कि दलित समाज अब अपने अधिकारों के लिए चुप नहीं बैठेगा और हर स्तर पर न्याय की मांग करेगा। यह आयोजन बिहार में दलित सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







