
महिला आरक्षण बिल: लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने वाले इस बिल पर सियासी घमासान मचा हुआ है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बता रहा है, वहीं विपक्षी दल केंद्र सरकार पर इसके क्रियान्वयन में देरी और गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं। इसी क्रम में बिहार के दरभंगा में भाकपा-माले और ऐपवा ने इसी मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया और मांग की कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण बिल को तत्काल प्रभाव से लागू करे।
दरभंगा, 24 अप्रैल 2026: भाकपा-माले और ऐपवा (ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमेन्स एसोसिएशन) ने संयुक्त रूप से केंद्र की मोदी सरकार पर महिला आरक्षण के सवाल पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए प्रतिवाद मार्च निकाला।

नेताओं ने मांग की कि 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू किया जाए और इसमें दलित व पिछड़ी समुदाय की महिलाओं के लिए उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए।
महिला आरक्षण बिल लागू करने की मुख्य मांगें
- महिला आरक्षण पर झूठा प्रचार बंद हो।
- 2023 में पारित महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए।
- महिला आरक्षण में दलित–पिछड़ी समुदाय की महिलाओं की उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित हो।
- मौजूदा 543 सीटों पर महिला आरक्षण लागू क्यों नहीं किया जा रहा, भाजपा इसका जवाब दे।
- ओबीसी/एससी/एसटी महिलाओं के लिए ओबीसी आरक्षण के तहत कोटा के भीतर कोटा तय हो।
मार्च का नेतृत्व भाकपा(माले) जिला सचिव बैद्यनाथ यादव, वरिष्ठ नेता आर के सहनी, समस्तीपुर जिला सचिव उमेश कुमार, ऐपवा नेत्री शनिचरी देवी, रानी सिंह और बंदना सिंह सहित कई प्रमुख नेता कर रहे थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस दौरान भारी संख्या में कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और महिला अधिकारों की मांग बुलंद की।
धीरेन्द्र झा ने भाजपा पर साधा निशाना
इस अवसर पर भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो सदस्य सह मिथिलांचल प्रभारी धीरेंद्र झा ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक तथा अन्य संबंधित विधेयक के गिरने के बाद फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार की हम निंदा करते हैं।
श्री झा ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण का प्रावधान सितंबर 2023 में ही संसद द्वारा पारित किया जा चुका है, जबकि हाल में गिरा विधेयक परिसीमन से संबंधित था। उन्होंने सवाल उठाया कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन को अनिवार्य शर्त क्यों बनाया जा रहा है? उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण को बिना किसी देरी के तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण के भीतर कोटा की मांग को भी मजबूती से उठाया जाए ताकि समाज में न्याय सुनिश्चित किया जा सके। विशेष रूप से, दलित और पिछड़ी महिलाओं के लिए उचित प्रतिनिधित्व के लिए ओबीसी आरक्षण की मांग एक महत्वपूर्ण पहलू है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
इस विरोध प्रदर्शन में नंदलाल ठाकुर, ललन पासवान, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, जीवछ पासवान, मयंक, दीपक, रौशन, रानी शर्मा और देवेंद्र कुमार सहित कई कार्यकर्ता व स्थानीय लोग शामिल थे।
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