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दरभंगा के मछुआरों के लिए खुशखबरी…रास्ता साफ अब मिलेगा सरकारी जलकर का लाभ

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बेनीपुर। दो दशक बाद एक बार पुनः बेनीपुर प्रखंड क्षेत्र के सामान्य मछुआरों को सरकारी जलकर का लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

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इसके लिए जिला मत्स्य विकास पदाधिकारी ने खुली डाक से बंदोबस्ती का तिथि निर्धारित कर दिया है। पिछले 6 दशक से बेनीपुर प्रखंड मत्स्य जीवी सहयोग समिति पर एक ही परिवार का कब्जा हुआ करता था जो मनमानी ढंग से समिति का संचालन एवं सैरातों का बंदोबस्ती एवं निष्पादन किया करते थे।

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लेकिन इस वर्ष मत्स्यजीवी सहयोग समिति के चुनाव में वह मिथक टूट गया और एक सामान्य समिति सदस्य सचिव पद पर निर्वाचित घोषित किए गए। लेकिन पुराने मत्स्यजीवी सहयोग समिति जो वित्तीय वर्ष 2019से 2022 तक मछली एवं मखाना सैरातों की बंदोबस्ती जिला मत्स्य विकास अभिकरण के द्वारा ली थी जिसका अद्यतन बंदोबस्ती राशि 24,61,450 रुपए अभी तक जमा नहीं हो पाई है।

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इसे लेकर जिला मत्स्य विकास पदाधिकारी जून माह में ही तत्काल के प्रभाव से मखाना एवं मछली के सैरातों से शिकार माही पर पूर्ण रोक लगा दी थी। लेकिन स्थानीय प्रशासन के मिलीभगत से चोरी-छिपे मखाना की निकासी तो पूर्ण रूप से कर ली गई।

कुछ मछली सैरातों में भी शिकार माही कर ली गई। लेकिन इस बीच मत्स्य विकास अभिकरण दरभंगा के मत्स्य विकास पदाधिकारी ने अपने पत्रांक 986 /8-11-22 की ओर सभी सैरातो की बंदोबस्ती खुली डाक से करने की सूचना निर्गत कर दिया है।

इसमें मछली सैरातों के लिए 30 नवंबर एवं 1 दिसंबर और मछली सैरातों के लिए 2और 3दिसम्बर समिति सदस्यों के बीच खुली डाक से बंदोबस्ती किए जाने और 12एवं 13 दिसंबर को मछली सैरातों एवं 14-15 दिसंबर को मखाना सैरातों की बंदोबस्ती आम लोगों के लिए खुली डाक से करने का निर्णय लिया है। जिसकी सूचना मिलते ही प्रखंड क्षेत्र में आम मछुआरों के चेहरे पर खुशी की झलक देखी जा रही है।

 

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क्योंकि विगत 60 वर्षों से मत्स्य जीवी सहयोग समिति के सदस्य अपनी मर्जी से अपने पक्षधर सदस्यों के साथ ही मनमानी राशि लेकर बंदोबस्त किया करते थे जिसमें कई सैरातों को मोटी रकम लेकर गैर मछुआरों के हाथ भी अघोषित तौर पर बेची जाती थी।

इससे पूर्व वर्ष 1998 में बेनीपुर के तत्कालीन प्रभारी अंचलाधिकारी राम सागर पासवान ने भी मत्स्य जीवी सहयोग समिति के इस घालमेल को पकड़ते हुए सारे बंदोबस्ती को रद्द करते हुए समिति के ऊपर करोड़ों रुपए की बकाया दर्शाते हुए सभी सेरातों को खुली डाक से बंदोबस्ती की थी। इससे की लाखों रुपए सरकारी राजस्व की प्राप्त हुई थी।

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इस बार पुनः खुली डाक से बंदोबस्ती होने पर अब तक के मिले राशि से कई गुना राशि राजस्व के रूप में सरकार को प्राप्त होने की प्रबल संभावना बन रही है। इस संबंध में पूछने पर जिला मत्स्य पदाधिकारी शंभु प्रसाद नायक ने बताया कि नियमानुसार बकायदा समिति या सदस्य के साथ पुर्न बंदोबस्ती नहीं किए जाने का प्रावधान है और सरकारी राजस्व की क्षति को देखते हुए खुले डाक से बंदोबस्ती का निर्णय लिया गया है।

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