जाले नल जल योजना न्यूज़: मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत जाले प्रखंड में संचालित ‘हर घर नल का जल’ योजना बदहाल स्थिति में पहुँच गई है। लगातार बारिश से अभी भले ही थोड़ी राहत है, लेकिन आने वाली भीषण गर्मी में अधिकांश पंचायतों में पेयजल संकट गहराने की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्वच्छ जलापूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जाले में नल जल योजना की बदहाली और चुनौतियाँ
जाले प्रखंड के कई पंचायतों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कहीं कंक्रीट नाला निर्माण के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई है, तो कहीं तेज आंधी में सीमेंट टावर पर रखी प्लास्टिक टंकी गिर जाने से जलापूर्ति ठप हो गई है। रतनपुर पंचायत के वार्ड संख्या 10 के भूतपूर्व सैनिक आस नारायण ठाकुर, किसान कृष्ण बिहारी ठाकुर और मदन सहनी जैसे ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में आई तेज आंधी से टावर पर रखी दो पानी की टंकियों में से एक तालाब में जा गिरी, लेकिन अभी तक विभागीय स्तर पर कोई देखने तक नहीं पहुंचा है।
पीएचईडी के हाथ में व्यवस्था, ग्रामीण परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि जब यह योजना पंचायत स्तर पर वार्ड सदस्यों द्वारा संचालित होती थी, तब स्थिति बेहतर थी और वार्ड सदस्य सक्रिय रहते थे। पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) के जिम्मा संभालने के बाद से तो स्थिति और भी खराब हो गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एक ही संवेदक को जाले और सिंहवाड़ा प्रखंड की जिम्मेदारी दिए जाने से कार्य प्रभावित हो रहा है, जिससे जाले नल जल योजना का संचालन पीएचईडी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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इधर, डीएम की समीक्षा बैठक में लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी के बाद अभियंताओं और संवेदकों पर दबाव जरूर बढ़ा है। अब देखना यह होगा कि डीएम की सख्ती का असर जमीन पर कितना दिखता है, या फिर भीषण गर्मी में भी लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा।







