Jale Nala: बिहार के दरभंगा जिले के जाले प्रखंड में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। सहसपुर पंचायत के वार्ड पांच में बना करीब 150 मीटर लंबा आरसीसी नाला, जो योजना संख्या 09/2023-24 के तहत तैयार किया गया था, निर्माण के महज एक वर्ष के भीतर ही जर्जर हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि नाले के कई ढक्कन टूट गए हैं और कई जगहों पर नाला क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे जल निकासी बाधित हो रही है।
एक साल में ही क्यों टूट गया 150 मीटर नाला?
जाले के सहसपुर पंचायत में जगदीश झा के घर से पवन झा के घर होते हुए बुधन नदाफ के घर तक बने इस नाले की बदहाली ने स्थानीय लोगों को आक्रोशित कर दिया है। ग्रामीण जीवेश कुमार झा और संतोष ठाकुर ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत सहयोग पोर्टल पर दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के बाद मुखिया प्रतिनिधि, पंचायत सचिव और अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि पोर्टल पर दिए गए जवाब में सिर्फ एक जगह नाले के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई, जबकि हकीकत इससे कहीं ज्यादा खराब है। ग्रामीणों के अनुसार, नाला कई जगहों से टूटा है, उसमें कचरा जमा है और पानी की निकासी में परेशानी हो रही है।






अधिकारियों की रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल
वार्ड पंच अमित कुमार ठाकुर ने निर्माण कार्य में घटिया गुणवत्ता का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ढक्कनों में पतली सरिया का इस्तेमाल किया गया, जिसकी वजह से वे एक साल में ही टूट गए। इसके अलावा, नाला निर्माण के बाद मिट्टी को ठीक से नहीं हटाया गया, जिससे सड़क भी खराब हो गई है। स्थानीय निवासी जरीना खातून ने बताया कि उनके घर के सामने नाले में कचरा फेंकने से गंदगी फैलती है और अक्सर विवाद होता रहता है। तेज नारायण झा ने तो निर्माण के समय ही गुणवत्ता पर आपत्ति उठाई थी, लेकिन उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
जाले बीपीआरओ द्वारा जिला प्रशासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट में नाला निर्माण को मानक के अनुरूप बताया गया है। इस रिपोर्ट में केवल एक स्थान पर ढक्कन के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने का जिक्र करते हुए उसकी मरम्मत कराने की बात कही गई है। तकनीकी सहायक अरविंद कुमार पासवान की रिपोर्ट में भी नाले को मानक अनुरूप बताते हुए केवल आंशिक क्षति का उल्लेख है।
ग्रामीणों को कब मिलेगी राहत?
एक ओर ग्रामीण नाले के कई जगह से टूटने और जल निकासी बाधित होने की शिकायत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की रिपोर्ट में सब कुछ ‘मानक के अनुरूप’ बताया जा रहा है। यह विरोधाभास स्थानीय लोगों के गुस्से को और बढ़ा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि उन्हें इस समस्या से जल्द से जल्द निजात मिल सके।








