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Darbhanga News: दरभंगा की किसानी को मिली Laser Land Leveling संजीवनी, खेतों को लेज़र तकनीक से करेंगे किसान अब समतल, जानिए – विशेषज्ञ ई.निधि से – कैसे होगी पानी और पैसे दोनों की बचत

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Laser Land Leveling: खेती में पानी और पोषक तत्वों की बर्बादी एक बड़ी समस्या है, जिसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ता है। लेकिन अब इस समस्या का समाधान आधुनिक कृषि तकनीक के रूप में सामने आया है, जो न सिर्फ जल बचत करती है बल्कि फसलों की पैदावार भी बढ़ाती है।

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कृषि विज्ञान केंद्र, जाले की मृदा एवं जल अभियांत्रिकी विशेषज्ञ ई. निधि कुमारी ने किसानों से खेती में जल एवं पोषक तत्वों की बचत के लिए भूमि समतलीकरण तकनीक अपनाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि लेजर लैंड लेवलर तकनीक की मदद से खेतों को समतल बनाकर सिंचाई, खाद एवं बीज का समान वितरण सुनिश्चित किया जा सकता है। यह Laser Land Leveling विधि किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।

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भूमि समतलीकरण: खेती में क्रांति! जानिये कैसे यह तकनीक बचा रही पानी और बढ़ा रही पैदावार

भूमि समतलीकरण: क्या आपकी खेती में पानी बेवजह बर्बाद हो रहा है और पैदावार मनचाही नहीं मिल पा रही? अगर हां, तो कृषि विज्ञान केंद्र की विशेषज्ञ निधि कुमारी ने किसानों के लिए एक ऐसी तकनीक बताई है, जो इन दोनों समस्याओं का समाधान कर सकती है। यह है ‘लेजर लैंड लेवलर’ तकनीक, जिससे खेतों को समतल कर आप अपनी खेती को दोगुना फायदेमंद बना सकते हैं।जाले। कृषि विज्ञान केंद्र की मृदा एवं जल अभियांत्रिकी विशेषज्ञ ई. निधि कुमारी ने किसानों से खेती में जल एवं पोषक तत्वों की बचत के लिए भूमि समतलीकरण तकनीक अपनाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि लेजर लैंड लेवलर तकनीक से खेतों को समतल बनाकर सिंचाई, खाद एवं बीज का समान वितरण सुनिश्चित किया जा सकता है। इससे न केवल संसाधनों की बचत होती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार आता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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तकनीक कैसे काम करती है?

ई. निधि कुमारी ने विस्तार से बताया कि इस तकनीक में खेत की पहले जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाया जाता है। इसके बाद, लेजर ट्रांसमीटर, रिसीवर, कंट्रोल बॉक्स, हाइड्रोलिक सिस्टम और स्क्रेपर जैसे उपकरणों की सहायता से खेत को समतल किया जाता है। इस प्रक्रिया के संचालन के लिए आमतौर पर 55-60 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर की आवश्यकता होती है। ट्रांसमीटर से निकलने वाली लेजर किरण के आधार पर, खेत के ऊंचे हिस्सों से मिट्टी काटकर निचले हिस्सों में भरी जाती है, जिससे पूरा खेत एक समान स्तर पर आ जाता है।

भूमि समतलीकरण के बड़े फायदे

समतल खेत के अनेक लाभ हैं। निधि कुमारी के अनुसार, समतल खेत में सिंचाई समान रूप से होने से 20 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, जो कि जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। बीज का अंकुरण और पौधों की वृद्धि बेहतर होने से उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।

  • खाद एवं उर्वरकों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है।
  • खरपतवारों की समस्या में कमी आती है।
  • सिंचाई लागत में उल्लेखनीय बचत होती है।
  • मिट्टी कटाव पर प्रभावी नियंत्रण मिलता है।
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यह तकनीक विशेष रूप से गेहूं, धान, मक्का, सरसों एवं दलहनी फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई है। इससे जलभराव और सूखे धब्बों की समस्या भी काफी हद तक कम होती है। सीमित सिंचाई वाले और ऊंच-नीच खेतों वाले क्षेत्रों में लेजर लैंड लेवलर तकनीक किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

क्या है लेजर लैंड लेवलिंग तकनीक?

यह एक आधुनिक कृषि तकनीक है जिसमें खेत की जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाई जाती है। इसके बाद लेजर ट्रांसमीटर, रिसीवर, कंट्रोल बॉक्स, हाइड्रोलिक सिस्टम और स्क्रेपर जैसे उपकरणों की सहायता से खेत को पूरी तरह समतल किया जाता है। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए 55-60 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर की आवश्यकता होती है। ट्रांसमीटर से निकलने वाली लेजर किरणें खेत के ऊंचे हिस्सों की मिट्टी को काटकर निचले हिस्सों में भरती हैं, जिससे पूरा खेत एक समान स्तर पर आ जाता है।

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Darbhanga News: दरभंगा की किसानी को मिली Laser Land Leveling संजीवनी, खेतों को लेज़र तकनीक से करेंगे किसान अब समतल, जानिए - विशेषज्ञ ई.निधि से - कैसे होगी पानी और पैसे दोनों की बचत

Laser Land Leveling के फायदे और उपयोग

समतल खेत में सिंचाई का पानी समान रूप से फैलने के कारण 20 से 30 प्रतिशत तक जल बचत होती है, जो सूखे की समस्या वाले क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही, बीजों का अंकुरण और पौधों की वृद्धि बेहतर होने से उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इसके अतिरिक्त, इस तकनीक से खाद एवं उर्वरकों का बेहतर उपयोग होता है, खरपतवारों की समस्या कम होती है, सिंचाई लागत में बचत होती है और मिट्टी के कटाव पर भी नियंत्रण मिलता है। यह तकनीक गेहूं, धान, मक्का, सरसों और दलहनी फसलों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। यह जलभराव और सूखे धब्बों जैसी समस्याओं को भी कम करती है। सीमित सिंचाई वाले और ऊंचे-नीचे खेतों वाले क्षेत्रों में यह जल बचत और उत्पादन वृद्धि के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है।यह तकनीक आधुनिक खेती की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन भी संभव होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंलेजर लैंड लेवलर: कृषि क्षेत्र में लगातार नई-नई तकनीकें आ रही हैं, जो किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। जाले कृषि विज्ञान केंद्र की मृदा एवं जल अभियांत्रिकी विशेषज्ञ ई. निधि कुमारी किसानों को इसी तकनीक के फायदे बता रही हैं।ई. निधि कुमारी ने किसानों से खेती में जल एवं पोषक तत्वों की बचत के लिए भूमि समतलीकरण तकनीक अपनाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि लेजर लैंड लेवलर तकनीक से खेतों को समतल बनाकर सिंचाई, खाद एवं बीज का समान वितरण सुनिश्चित किया जा सकता है। यह उन्नत कृषि तकनीक सिंचाई, खाद और बीज के समान वितरण को सुनिश्चित करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। उन्होंने बताया कि इस तकनीक में पहले खेत की जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाई जाती है। इसके बाद लेजर ट्रांसमीटर, रिसीवर, कंट्रोल बॉक्स, हाइड्रोलिक सिस्टम और स्क्रेपर की सहायता से खेत को समतल किया जाता है। इसके संचालन के लिए 55-60 हॉर्स पावर के ट्रैक्टर की आवश्यकता होती है। ट्रांसमीटर से निकलने वाली लेजर किरण के आधार पर ऊंचे हिस्से की मिट्टी काटकर निचले हिस्से में भरी जाती है, जिससे पूरा खेत एक समान स्तर पर आ जाता है।

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20 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत?

ई. निधि कुमारी के अनुसार, समतल खेत में सिंचाई समान रूप से होने से 20 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। बीज अंकुरण और पौधों की वृद्धि बेहतर होने से उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। इसके अन्य मुख्य फायदे इस प्रकार हैं:• खाद एवं उर्वरकों का बेहतर उपयोग
• खरपतवार में कमी
• सिंचाई लागत में बचत
• मिट्टी कटाव पर नियंत्रणसाथ ही, मिट्टी के कटाव को भी नियंत्रित किया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह आधुनिक कृषि तकनीक गेहूं, धान, मक्का, सरसों और दलहनी फसलों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है।

सीमित संसाधनों में किसानों के लिए वरदान

इस तकनीक से जलभराव और सूखे धब्बों की समस्या भी कम होती है। सीमित सिंचाई वाले एवं ऊंच-नीच खेतों वाले क्षेत्रों में लेजर लैंड लेवलर तकनीक किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। कृषि से जुड़ी ऐसी ही और देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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