
दरभंगा | जिले के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) जूनैद आलम की अदालत ने शुक्रवार को एक अहम आदेश जारी करते हुए सिमरी थाना कांड संख्या 243/25 के प्राथमिकी अभियुक्त मोहम्मद रिजवी उर्फ राजा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया।
क्या है मामला ?
आरोप है कि आरोपी ने महागठबंधन (Mahagathbandhan) के मंच से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी माता हीराबेन मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।
प्राथमिकी सिमरी थाना में दर्ज की गई थी।
आरोपी का नाम भपूरा निवासी मोहम्मद रिजवी उर्फ राजा है।
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसे शुक्रवार को CJM कोर्ट दरभंगा में पेश किया गया।
अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपी को 11 सितंबर 2025 तक न्यायिक अभिरक्षा में दरभंगा जेल भेज दिया।
किसने की — शिकायत ?
इस मामले में शिकायत दर्ज कराने वाले हैं भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य नारायण चौधरी ‘मन्ना’। उन्होंने 28 अगस्त 2025 को सिमरी थाना में आवेदन देकर कहा था कि:
राष्ट्रविरोधी मानसिकता रखने वाले कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।
इससे न केवल प्रधानमंत्री की गरिमा आहत हुई, बल्कि यह राष्ट्र का अपमान भी है।
इस बयान को जानबूझकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, ताकि देशविरोधी ताकतों को बल मिले।
Darbhanga Police की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की।
सिमरी थानाध्यक्ष ने जांच के बाद आरोपी मोहम्मद रिजवी उर्फ राजा को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार कर उसे दरभंगा CJM कोर्ट में प्रस्तुत किया गया।
अदालत ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
यह घटना स्थानीय और राज्य स्तर पर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी सिर्फ राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह देश की एकता पर भी हमला है।
वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि मामला तूल पकड़ रहा है और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
लोकतंत्र में Freedom of Speech का अधिकार — जिम्मेदारी के साथ
दरभंगा CJM कोर्ट द्वारा दिया गया यह आदेश बताता है कि किसी भी सार्वजनिक मंच से दिए गए आपत्तिजनक बयान को हल्के में नहीं लिया जाएगा। खासकर जब मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति और उनके परिवार से जुड़ा हो।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और अदालत के निर्देश ने यह साफ कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं और लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) का अधिकार जिम्मेदारी के साथ प्रयोग करना चाहिए।