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बिहार शिक्षक नियुक्ति में बीएड डिग्री धारक अभ्यर्थियों को वर्ग एक से पांच में शामिल करने से जुड़ी रिट याचिका पर Supreme Court में सुनवाई टली, अब आगे ये होगा?

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बिहार के मिडिल स्कूलों में चल रहे शिक्षक नियुक्ति में बीएड डिग्री धारक अभ्यर्थियों को वर्ग एक से पांच में शामिल करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका की सुनवाई टल गई है।

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जानकारी के अनुसार, प्राथमिक शिक्षक भर्ती में बीएड अभ्यर्थियों को शामिल करने से जुड़ी याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। इसे लेकर बीएड अभ्यर्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई है। इस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी थी लेकिन सुनवाई टल गई।

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जस्टिस एएस बोपन्ना और एम सुंदरेश की खंडपीठ में सुनवाई टलने से बीएड अभ्यर्थियों का इंतजार और लम्बा खींच गया है। कोर्ट ने इस मामले को अब चीफ जस्टिस के बेंच में ट्रांसफ़र कर दिया है। इसको लेकर बिहार सरकार के तरफ से नई एसएलपी दायर की गई थी। बिहार सरकार की तरफ से जो याचिका दायर की गई थी उसे वापस ले लिया गया।

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अब इस मामले की सुनवाई कब होगी इसको लेकर फिलहाल कोई तारीख तय नहीं की गई है। इसके साथ ही,बिहार में 1.70 लाख शिक्षकों की बहाली निकाली गई है।

इसमें कक्षा एक-पांच तक 79,943 पदों पर शिक्षकों की बहाली होनी है। हालंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही राजस्थान से जुड़े एक मामले में कहा है कि बीएड अभ्यर्थियों को प्राथमिक शिक्षक के रूप में शामिल नहीं किया जा सकता है।

इसी आधार में बिहर में भी बीएड अभ्यर्थियों को कोर्ट से पहले ही झटका लग चुका है सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में बीएड अभ्यर्थियों के तरफ से या दलील दी गई है कि बिहार लोक सेवा आयोग के नोटिफिकेशन के अनुसार ही बीएड डिग्रीधारी ने प्राथमिक में शिक्षक बनने

हेतु आवेदन किया था परंतु अब उनका रिजल्ट जारी नहीं किया जा रहा है। ऐसे में उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। जबकि, इससे पहले भी बीएड डिग्रीधारी प्राथमिक स्कूल में बहाली हुई है।

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बिहार सरकार का कहना है कि इस मामले में राज्य एफिलिएटिड है इसलिए याचिकाकर्ता सीधा सुप्रीम कोर्ट आ गए हैं। बिहार सरकार का कहना है कि अब इस मामले में याचिका दाखिल करने का कोई भी औचित्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में आज याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि- इस मामले में सुनवाई उसी बेंच में होनी चाहिए, जिन्होंने राजस्थान के मामले में सुनवाई की थी।

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वकील का कहना है कि, इस मामले को जस्टिस अनुरोध बॉस के बेंच में लिस्ट किया। इसके बाद आज इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस ए एस बोपन्ना एवं एम सुंदरेश की खंडपीठ इस मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया। इसके बाद अब इस ममाले की सुनवाई किस बेंच में होगी इसका फैसला चीफ जस्टिस को करना है।

एक बार फिर से इसे लेकर रिट याचिका दायर की गई है। इसकी सुनवाई को लेकर जस्टिस एएस बोपन्ना और एम सुंदरेश की खंडपीठ ने वापस से अनिरुद्ध बोस के बेंच जाने की सलाह दी है।

जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने ही राजस्थान मामले में फैसला दिया था कि डीएलएड पास अभ्यर्थी ही प्राइमरी स्कूल में शिक्षक बन सकते हैं। ऐसे में, आज की सुनवाई टलने से एक बार फिर से बीएड अभ्यर्थियों का इंतजार और ज्यादा लंबा हो गया है।

बिहार में 1.70 लाख शिक्षकों की बहाली निकाली गई। इस बहाली में प्राइमरी स्कूल में कक्ष 1-5 तक 79,943, 9-10 के लिए 32,916 और 11-12 के लिए 57,602 पदों पर बहाली निकाली गई।

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बीपीएसपी ने शिक्षक बहाली 2023 के लिए परीक्षा भी ले ली है। इसमें करीब 6 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। इसमें बीएड अभ्यर्थी की संख्या करीब तीन लाख 90 हजार थी। ऐसे में इन बीएड अभ्यर्थियों की उम्मीद अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है।

वहीं, बीएड अभ्यर्थियों के तरफ से याचिकाकर्ता दीपांकर गौरव व मीकू पाल ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि एनसीटीई के जिस गजट को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त किया है उसी गजट से पूरे देश मे लाखों बीएड योग्यताधारी प्राथमिक में बहाल हुए हैं।

बिहार में भी छठे चरण में बीएड योग्यताधारी प्राथमिक में शिक्षक बने हैं, उसके अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केंद्रीय विद्यालय में भी प्राथमिक में बीएड योग्यताधारी बहाल हुए हैं।

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