Madhubani Prasuta Death News: बेनीपट्टी निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत पर बवाल, हंगामा, कौन बोल रहा झूठ! तहकीकात में होगा राफ -साफ? एक तरफ पीड़ित पक्ष। सामने अस्पताल प्रबंधन ?
मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में एक निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद जमकर बवाल हुआ। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही और गलत इलाज का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है, और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
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कैसे हुई प्रसूता काजल देवी की मौत?
मृतका की पहचान रहिका थाना क्षेत्र के डुमरी गांव निवासी संजय चौपाल की 24 वर्षीय पत्नी काजल देवी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, काजल देवी को प्रसव पीड़ा के बाद 28 मई को बेनीपट्टी स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में शल्य चिकित्सा के माध्यम से प्रसव कराया गया, जिसके बाद उन्होंने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया।
नवजात के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद प्रसूता की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उनकी स्थिति गंभीर होने के बावजूद उचित उपचार नहीं किया गया और बाद में उन्हें जल्दबाजी में दरभंगा रेफर कर दिया गया। दरभंगा में दो दिनों तक चले उपचार के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव के कारण चार यूनिट रक्त चढ़ाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।
परिजनों और अस्पताल के आरोप-प्रत्यारोप
मौत की खबर मिलते ही परिवार में आक्रोश फैल गया। मृतका की ननद काजल कुमारी ने बेनीपट्टी थाना में लिखित शिकायत देकर अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि ऑपरेशन एक ऐसी महिला द्वारा किया गया जो चिकित्सक नहीं थीं और उपचार के दौरान भारी लापरवाही बरती गई, जिसके कारण काजल देवी की जान चली गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इलाज को लेकर सवाल उठाया तो अस्पताल से जुड़े कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की।
मृतका के आक्रोशित परिजन शव को लेकर सीधे अस्पताल पहुंचे और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। कई घंटों तक नारेबाजी और हंगामा चलता रहा। मामले की गंभीरता को देखते हुए बेनीपट्टी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अमित कुमार, पुलिस निरीक्षक नीरज कुमार वर्मा, थाना अध्यक्ष शिव शरण साह, अंचल अधिकारी अभिषेक आनंद सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। प्रशासन ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे दोषियों की गिरफ्तारी और हत्या का मामला दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। काफी मशक्कत और आश्वासन के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मधुबनी सदर अस्पताल भेजा।
दूसरी ओर, अस्पताल की संचालक ने भी थाना में आवेदन देकर परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मृतका के परिजनों ने अस्पताल से पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। रकम नहीं मिलने पर अस्पताल में तोड़फोड़ की गई, कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप निराधार हैं।
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पुलिस कर रही मामले की गहन जांच
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, संबंधित निजी अस्पताल के पास वैध विभागीय पंजीकरण उपलब्ध है। पुलिस ने दोनों पक्षों द्वारा दिए गए आवेदनों को आधार बनाकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। पुलिस और प्रशासन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रसूता की मौत चिकित्सकीय लापरवाही का परिणाम थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
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