
Makhana Cultivation: बिहार के मिथिलांचल के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है! डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा की एक विशेष परियोजना से अब मखाना की खेती किसानों की तकदीर बदल सकती है, जिससे उनकी आय दोगुनी होने की उम्मीद है। यह परियोजना झंझारपुर में सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है, जो इस क्षेत्र में मखाना उत्पादन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आर्थिक मजबूती प्रदान कर रही है।
मखाना परियोजना की सफलता और Makhana Cultivation
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (पूसा) द्वारा संचालित मखाना परियोजना मिथिलांचल के किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने और मखाना उत्पादन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक नई मिसाल पेश कर रही है। विश्वविद्यालय के मखाना अनुसंधान एवं विकास उत्कृष्टता केंद्र के तत्वाधान में क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, झंझारपुर द्वारा इस परियोजना का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है।

परियोजना के तहत, झंझारपुर स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के परिसर में 0.5 हेक्टेयर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को उच्च श्रेणी के बीज उपलब्ध कराना है ताकि फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

‘स्वर्ण वैदेही मखाना’ से बदल रही तस्वीर
वैज्ञानिक मार्गदर्शन में मखाना की उन्नत किस्म ‘स्वर्ण वैदेही मखाना’ का अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन किसानों के खेतों पर सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इस पहल ने किसानों को नई तकनीकों और उन्नत किस्मों से सीधे जोड़ने का काम किया है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया:
- भागवत मुखिया, ग्राम मेहथ, प्रखंड झंझारपुर
- परमेश्वर मुखिया, ग्राम भगवतीपुर, प्रखंड पंडौल
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की संभावनाएँ
परियोजना के निरीक्षण हेतु पहुंची परियोजना निदेशक डॉ. पूजा सिंह ने झंझारपुर और आसपास के क्षेत्रों में संचालित मखाना खेती का जायजा लिया। किसानों के खेतों पर लहलहाती फसल को देखकर उन्होंने टीम के कार्यों की सराहना की और कहा, “मखाना एक ‘सुपर फूड’ है जिसकी मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है। उन्नत तकनीकों और स्वर्ण वैदेही जैसी किस्मों के प्रयोग से मिथिला के किसानों की आय निश्चित तौर पर दोगुनी होगी। यह खेती आने वाले समय में क्षेत्र के लिए सबसे लाभकारी सौदा साबित होगी, खास तौर पर Makhana Cultivation में।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। निरीक्षण दल में क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. संजय कुमार के साथ डॉ. घनश्याम नाथ झा, डॉ. सुमित कुमार, श्री धीरेंद्र कुमार, श्री आशीष राय, सुधांशु रंजन और अशोक राम सहित कई वैज्ञानिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर मखाना उत्पादक किसान श्री महेश्वर ठाकुर, रंजीत मुखिया, भागवत मुखिया, परमेश्वर मुखिया एवं अशोक कुमार चौधरी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति और कृषि कर्मचारी भी मौजूद थे।
यह परियोजना मिथिलांचल के किसानों के लिए एक सुनहरे भविष्य की नींव रख रही है, जहाँ मखाना की खेती केवल एक पारंपरिक फसल नहीं, बल्कि समृद्धि का प्रतीक बन रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।








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