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Muzaffurpur News: मुजफ्फरपुर में Big Cyber Crime का पर्दाफाश, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को बेचा जा रहा था करोड़ों लोगों का डेटा, Darbhanga के क्रिमिनल समेत 4 गिरफ्तार

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Cyber Crime: मुजफ्फरपुर में पुलिस ने एक बड़े खेल का भंडाफोड़ किया है! यहां कुछ शातिर लोग आम जनता के व्यक्तिगत डेटा को धड़ल्ले से विदेशी साइबर गैंग को बेच रहे थे। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर एक बड़े साइबर नेटवर्क का खुलासा किया है।

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पुलिस के मुताबिक, यह पूरा मामला तब सामने आया जब 21 अप्रैल 2026 को गोपनीय सूचना मिली। गरहां ओपी (अहियापुर) क्षेत्र के कफेन चौधरी गांव निवासी रिषभ कुमार अवैध तरीके से API तैयार कर लोगों की संवेदनशील जानकारी जैसे मोबाइल नंबर, आधार, पैन कार्ड, वाहन और IMEI डेटा विदेशी साइबर गिरोहों को बेच रहा था। यह एक गंभीर मामला था, क्योंकि इसमें आम नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा सीधे तौर पर खतरे में था।

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कैसे हुआ Cyber Crime का पर्दाफाश?

इस सनसनीखेज Cyber Crime की गंभीरता को देखते हुए, वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर डीएसपी के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। इस टीम में बिहार एसटीएफ, जिला आसूचना इकाई और साइबर थाना की तकनीकी टीम के विशेषज्ञ शामिल थे। टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रिषभ कुमार को धर दबोचा। उसकी निशानदेही पर तीन अन्य सहयोगी — गाजीपुर, यूपी का दीपक चौधरी उर्फ आशु कुमार, दरभंगा का सुधांशु कुमार और मुजफ्फरपुर का साहिल कुमार — भी गिरफ्तार किए गए।

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जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे और टेलीग्राम ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा करते थे। इसके बाद टेलीग्राम बॉट और OSINT टूल्स का उपयोग करके यह संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा विदेशी अपराधियों तक पहुंचाया जाता था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह नेटवर्क इतना शातिर था कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा की खरीद-फरोख्त हो रही थी।

फर्जी सिम और टेलीग्राम से चल रहा था खेल

पुलिस ने आरोपियों के पास से 7 मोबाइल फोन और 1 आईपैड बरामद किया है। इन डिवाइस की जांच में कई संदिग्ध टेलीग्राम ग्रुप और चैनल मिले हैं, जो इस अवैध धंधे का हिस्सा थे। मुख्य आरोपी रिषभ कुमार के बैंक खातों में जमा करीब 4 लाख रुपये को भी फ्रीज कर दिया गया है।

कैसे हुआ पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़?

एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 21 अप्रैल 2026 को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर अहियापुर थाना क्षेत्र के गरहा ओपी इलाके में पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस को खबर मिली थी कि कफेन चौधरी निवासी रिशम कुमार अवैध तरीके से एपीआई (API) बनाकर आम लोगों का Personal Data Selling विदेशों में सक्रिय गिरोहों को कर रहा था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें बिहार एसटीएफ, जिला आसूचना इकाई और साइबर थाना की टीम शामिल थी।

आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी रिशम कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर तीन अन्य आरोपियों – गाजीपुर, यूपी निवासी दीपक चौधरी उर्फ आशु कुमार, दरभंगा निवासी सुधांशु कुमार और मुजफ्फरपुर निवासी साहिल कुमार – को भी दबोचा गया। सभी आरोपियों के पास से एक-एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया।

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विदेशी कनेक्शन और ₹4 लाख का संदिग्ध लेनदेन

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह गिरोह फर्जी सिम कार्ड और टेलीग्राम आईडी का इस्तेमाल कर रहा था। वे लोगों की निजी जानकारी जैसे मोबाइल नंबर, आधार, पैन, वाहन और बैंकिंग डिटेल्स को अवैध रूप से इकट्ठा करके टेलीग्राम बॉट और API/OSINT टूल्स के माध्यम से विदेशी साइबर अपराधियों को बेचते थे। मुख्य आरोपी रिशम कुमार के पास से चार मोबाइल फोन और एक आईपैड बरामद किया गया है।

आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इन डिवाइसों में टेलीग्राम के जरिए कई संदिग्ध ग्रुप और चैनल संचालित होने के प्रमाण मिले हैं, जो डेटा की खरीद-बिक्री में शामिल थे। इसके अलावा, विभिन्न प्रकार के डेटा API का अवैध उपयोग भी सामने आया है। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों में करीब 4 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है, जिसे तत्काल फ्रीज कर दिया गया है। आरोपियों के मोबाइल फोन में विदेशी गिरोहों के साथ डेटा खरीद-बिक्री से जुड़ी बातचीत भी मिली है, जिसकी गहन जांच जारी है। यह पूरा मामला Personal Data Selling के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करता है और बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी का संकेत देता है।

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यह साइबर धोखाधड़ी से बचाव के लिए सभी नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता पर जोर देता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

आगे की जांच जारी: विदेशी कनेक्शन की तलाश

फिलहाल, पुलिस इस पूरे रैकेट के विदेशी कनेक्शन और अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी हुई है। यह घटना साइबर सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक है, क्योंकि इसमें आम लोगों की निजी जानकारी का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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