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Muzaffarpur CyberCrime: 12 राज्यों में फैला था ठगी का नेटवर्क, गेमिंग-ट्रेडिंग से करोड़ों की धोखाधड़ी, दो शातिर गिरफ्तार

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Muzaffarpur Cybercrime: इंटरनेट की दुनिया जितनी चमकदार है, इसके अंधेरे कोने उतने ही खतरनाक हैं, जहां ठगी के मकड़े अपना जाल बुनते हैं। लेकिन मुजफ्फरपुर पुलिस की एक कार्रवाई ने ऐसे ही एक बड़े जाल को तोड़ दिया है। साइबर थाने की टीम ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ऑनलाइन गेमिंग और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर देश के 12 राज्यों में करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहा था। इस मामले में दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।

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Muzaffarpur Cybercrime: कैसे काम करता था यह गिरोह?

पुलिस जांच के अनुसार, यह गिरोह बेहद शातिराना तरीके से काम करता था। आरोपी ग्रामीण इलाकों के भोले-भाले लोगों को अपना निशाना बनाते थे। उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज हासिल कर उनके नाम पर फर्जी कंपनियां खोल दी जाती थीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन कंपनियों का जीएसटी पंजीकरण भी कराया जाता था, ताकि सब कुछ कानूनी लगे। इन्हीं फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोले जाते थे और ठगी की रकम इन्हीं खातों में मंगवाई जाती थी।

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साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने बताया कि आर्थिक अपराध इकाई के ‘साइबर प्रहार’ अभियान के तहत यह बड़ी सफलता मिली है। जांच के दौरान कुछ बैंक खातों में करीब 1.18 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला, जिसकी गहराई से पड़ताल करने पर इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हो गया। यह गिरोह अब तक लगभग 30 लोगों को अपना शिकार बना चुका है, हालांकि पुलिस का मानना है कि पीड़ितों की वास्तविक संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई लोग शर्म या डर के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते।

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पुलिस की गिरफ्त में आए शातिर, बरामद हुआ जखीरा

साइबर थाने को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने रामपुरहरि थाना क्षेत्र में छापेमारी कर दोनों आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की तलाशी लेने पर पुलिस को उनके पास से ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं। पुलिस ने इनके ठिकाने से जो सामान जब्त किया है, उसमें शामिल हैं:

  • 14 अलग-अलग बैंकों के डेबिट कार्ड
  • 11 बैंकों की चेकबुक
  • 3 सादी चेकबुक (जिन पर खाताधारक के हस्ताक्षर पहले से थे)
  • 9 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप
  • 5 फर्जी कंपनियों की मुहरें
  • बैंक पासबुक, आधार कार्ड और पैन कार्ड
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पुलिस का मानना है कि इन्हीं उपकरणों और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके यह गिरोह अपना जाल पूरे देश में फैला रहा था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

गांव के लोगों को बनाते थे निशाना

इस गिरोह की कार्यप्रणाली का सबसे अहम हिस्सा था गांव के लोगों को झांसे में लेना। उनके दस्तावेजों पर खोली गई कंपनियों के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था। इससे आरोपी सीधे तौर पर पकड़ में आने से बच जाते थे। इसी अभियान के तहत सीतामढ़ी जिले में भी एक ऐसे ही शख्स को गिरफ्तार किया गया है, जो साइबर ठगों को बैंक खाते मुहैया कराता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ताकि गिरोह के बाकी सदस्यों तक पहुंचा जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी पूरी सख्ती से जारी रहेगा।

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