
Digital Arrest Fraud: मुजफ्फरपुर में एक बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है! पुलिस को चकमा देकर लोगों को ठगने वाले बदमाशों ने एक बुजुर्ग से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 17 लाख रुपये लूट लिए। लेकिन साइबर पुलिस की फुर्ती से ये शातिर अपराधी अब सलाखों के पीछे हैं।
मुजफ्फरपुर में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। साइबर थाना पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह के तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एक 73 वर्षीय पीड़ित भोला प्रसाद महतो के लिखित आवेदन के बाद हुई, जिन्होंने वीडियो कॉल के जरिए मानसिक दबाव बनाकर 17 लाख रुपये ठगे जाने की शिकायत दर्ज कराई थी।
CBI अधिकारी बनकर दिया झांसा
भोला प्रसाद महतो ने बताया कि 5 अप्रैल से उन्हें अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वीडियो कॉल आने लगे। इन कॉल पर खुद को पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताने वाले लोगों ने उन्हें धमकाना शुरू किया। अपराधियों ने उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाया और मानसिक रूप से परेशान किया। दबाव में आकर, उन्होंने 10 अप्रैल को अपने बैंक खाते से RTGS के जरिए 17 लाख रुपये ब्रजेश कुमार नाम के व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर कर दिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पीड़ित को 13 अप्रैल को इस ठगी का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने तत्काल बैंक और हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
विशेष टीम का गठन और आरोपियों की धरपकड़
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना में कांड संख्या 58/26 दर्ज किया गया। वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम गठित की गई। तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और बैंक ट्रांजेक्शन की गहन जांच के आधार पर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। इस टीम ने गिरोह के तीन सदस्यों – ब्रजेश कुमार, कृष्णा कुमार और विक्रम कुमार को गिरफ्तार कर लिया। इन गिरफ्तारियों से साइबर अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
अंतरराज्यीय ‘Digital Arrest Fraud’ गिरोह का पर्दाफाश
गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण सबूत बरामद हुए हैं, जिनमें मोबाइल फोन, चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड शामिल हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल देश भर में हुए कई Digital Arrest Fraud मामलों में किया गया था। प्रारंभिक जांच से यह सामने आया है कि यह गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय है और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए-नए तरीकों से आम लोगों को निशाना बना रहा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पुलिस फिलहाल गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताने वाले लोगों से सतर्क रहें। ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें, ताकि ऐसे साइबर अपराध पर लगाम लगाई जा सके।
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड: ऐसे दिया गया झांसे में
मुजफ्फरपुर में साइबर अपराध के खिलाफ साइबर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह के बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई एक पीड़ित, सदर थाना क्षेत्र के 73 वर्षीय भोला प्रसाद महतो के लिखित आवेदन के आधार पर की गई, जिन्होंने वीडियो कॉल के जरिए मानसिक दबाव बनाकर 17 लाख रुपये ठगे जाने की शिकायत दर्ज कराई थी।
पीड़ित ने बताया कि 5 अप्रैल से उन्हें अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वीडियो कॉल आने शुरू हुए। कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताया और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाते हुए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। इसी दबाव में आकर 10 अप्रैल को उनके बैंक खाते से RTGS के जरिए 17 लाख रुपये ब्रजेश कुमार नाम के व्यक्ति के फेडरल बैंक, भगवानपुर शाखा स्थित खाते में ट्रांसफर करवा लिए गए। 13 अप्रैल को जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने बैंक और हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना में कांड संख्या 58/26 दर्ज किया गया। वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। इस टीम ने तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल और बैंक ट्रांजेक्शन की गहन जांच की। इसके आधार पर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए गिरोह के तीन सदस्यों – ब्रजेश कुमार, कृष्णा कुमार और विक्रम कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड जैसे अहम सबूत बरामद किए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी के कई मामलों में किया जा रहा था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश और अपील
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय है और ‘डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड’ जैसे नए-नए तरीकों से लोगों को अपना निशाना बना रहा था। फिलहाल, पुलिस गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताने वालों से सावधान रहें और ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना साइबर हेल्पलाइन पर दें। वे इस तरह की साइबर ठगी से सावधान रहें।







