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Bihar Bridge Safety News: बिहार के पुलों पर संकट! 23 खतरनाक, 4 पर भारी वाहन बैन; बड़ा फैसला, पढ़िए – Darbhanga समेत 14 जिलों का हाल

पथ निर्माण विभाग की समीक्षा में बिहार के 638 पुलों में से 23 की हालत गंभीर पाई गई है। यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े, इसके लिए 4 पुलों पर भारी वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया है। यह बड़ा फैसला आवागमन को सुरक्षित बना रहा है।

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Bihar Bridge Safety News: बिहार में पुलों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में विभाग के सभाकक्ष में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (BRPNNL) के तहत आने वाले 60 मीटर से अधिक लंबाई के पुलों की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा जांच रिपोर्ट का गहन विश्लेषण करना था। समीक्षा के दौरान सामने आई जानकारी ने अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है।

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पहचान किए गए पुलों की चौंकाने वाली स्थिति

राज्यभर में मौजूद 60 मीटर से अधिक लंबाई वाले कुल 638 पुलों को चिन्हित किया गया था, जिनकी जांच प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। बैठक में सचिव को बताया गया कि इन सभी 638 पुलों का विस्तृत निरीक्षण किया गया है। इस जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चिंताजनक हैं। कुल 23 पुलों को गंभीर स्थिति में पाया गया है, जिनकी तत्काल मरम्मत और सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता है। इन पुलों में कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग शामिल हैं, जो लाखों लोगों के दैनिक आवागमन का आधार हैं।

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जिन जिलों में इन पुलों की जांच की गई, उनमें पश्चिम चंपारण 49, पटना 36, मुजफ्फरपुर 39, अररिया 38, पूर्णिया 27, किशनगंज 37, कटिहार 36, सुपौल 35, पूर्वी चंपारण 30, दरभंगा 29, गयाजी 25, नवादा 20, जमुई 16 और सहरसा 19 शामिल हैं। यह व्यापक जांच सुनिश्चित करती है कि राज्य के हर कोने के पुलों की स्थिति पर ध्यान दिया जा सके, जो बिहार की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

यात्रियों की सुरक्षा हेतु विभाग का बड़ा कदम

गंभीर स्थिति वाले पुलों पर तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जिन 23 पुलों की हालत गंभीर मिली है, उनमें से 10 की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पांच अत्यंत क्रिटिकल स्थानों पर नए पुलों के निर्माण की योजना बनाई गई है। यह कदम दीर्घकालिक समाधान प्रदान करेगा और भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकेगा।

फिलहाल, चार पुलों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। इन पुलों पर केवल छोटी और हल्की गाड़ियों के परिचालन की अनुमति है। एक अन्य संवेदनशील स्थल पर सुचारु आवागमन बनाए रखने के लिए वैकल्पिक डायवर्जन निर्माण का कार्य तेजी से प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, आठ पुलों के रखरखाव के लिए निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि निविदा की प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा किया जाए ताकि मरम्मत कार्य अविलंब शुरू हो सके। इन प्रयासों से पूरे प्रदेश में Bihar Road Infrastructure को मजबूती मिलेगी।

भविष्य की सुरक्षा के लिए निगरानी और सख्त निर्देश

जांच में 50 अन्य पुलों में सामान्य मरम्मत और सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पाई गई है। इन सभी पर विभागीय अभियंताओं की देखरेख में कार्य तीव्र गति से चल रहा है। सचिव पंकज कुमार पाल ने प्रत्येक पुल की जांच रिपोर्ट की गहराई से समीक्षा की और अभियंताओं को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के दिशानिर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन पुलों में किसी भी प्रकार की मरम्मत की आवश्यकता पाई गई है, उन पर बिना किसी देरी के युद्धस्तर पर कार्य शुरू किया जाए।

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बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि आईआईटी पटना द्वारा राज्य के अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ‘लाइफलाइन’ माने जाने वाले 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले 47 पुलों की भी जांच की गई है। आईआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई की जा रही है, जो इन बड़े और महत्वपूर्ण संरचनाओं की मजबूती सुनिश्चित करेगी। सचिव ने जोर देकर कहा कि पुलों की लगातार निगरानी के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की क्षति की पूर्व सूचना समय पर प्राप्त हो सके और बड़ी दुर्घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

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उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि जिन प्रमंडलों में कार्य की गति धीमी पाई जाएगी या गुणवत्ता में कमी होगी, वहां के संबंधित अभियंताओं पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के दिशा-निर्देशन में राज्य में आवागमन को सुगम और सुरक्षित बनाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलों के रख-रखाव और सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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पथ निर्माण विभाग का यह ठोस कदम न केवल वर्तमान में पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत और सुरक्षित सड़क नेटवर्क की नींव भी रखेगा। इससे बिहार के नागरिकों को सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा और राज्य के विकास को गति मिलेगी।

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