
बिहार चीनी मिल: कभी बिहार की शान समझी जाने वाली चीनी मिलें, जो सालों से बंद पड़ी थीं, अब उनके दिन फिरने वाले हैं। राज्य सरकार ने इन मिलों को दोबारा चालू करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत 38 साल पुराने एक कानून में बदलाव किया जाएगा।
बिहार में बंद पड़ी बिहार चीनी मिलों को लेकर राज्य सरकार ने कमर कस ली है। इन मिलों को फिर से चालू करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। इसी कड़ी में अब सरकार निजी कंपनियों के माध्यम से इन मिलों को चलाने का रास्ता साफ कर रही है, जिसके लिए एक पुराने एक्ट में संशोधन किया जाएगा।
अब निजी हाथों में जा सकेंगी बंद पड़ी बिहार चीनी मिल
जानकारी के अनुसार, बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) अधिनियम 1985 की धारा तीन में संशोधन को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है। यह कानून तब बनाया गया था, जब राज्य सरकार चीनी मिलों का अधिग्रहण कर रही थी, ताकि अधिग्रहित मिलों को केवल राज्य सरकार ही चलाए। हालांकि, राज्य सरकार के संचालन में आने वाली ये सभी मिलें धीरे-धीरे बंद हो गईं। इस अधिनियम के कारण बंद पड़ी मिलों को सहकारी संस्थाओं को सौंपने में भी बाधा आ रही थी, जिसके चलते अब यह बड़ा बदलाव किया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
एक करोड़ रोजगार सृजन का लक्ष्य
बिहार सरकार राज्य में एक करोड़ रोजगार सृजित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, बंद चीनी मिलों को फिर से चालू करने के साथ-साथ 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
गन्ना किसानों और गन्ना उद्योग को मिलेगा सहारा
राज्य सरकार ने बिहार में गन्ना उद्योग को बढ़ावा देने और चीनी मिलों को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए भी ठोस कार्रवाई शुरू की है। अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने बताया कि राज्य में चीनी मिल उद्योगों की आर्थिक स्थिति सुधारने और गन्ना किसानों के हितों को देखते हुए जेडीसी के कमीशन में कटौती की गई है। इस प्रस्ताव को भी कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। गन्ना उद्योग विभाग ने सरकार के आदेश पर क्षेत्रीय विकास परिषद के कमीशन में 90 फीसदी की भारी कटौती की है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।







