spot_img

Bihar Holi: बरसाना जैसी अलबेली ‘घुमौर’ होली, जहां लाठियां नहीं, कंधे हैं रंगों का मैदान!

spot_img
- Advertisement -

Bihar Holi: रंगों का खुमार जब दिलोदिमाग पर छाए, तो समझिए प्रकृति भी मस्ती के रंग में सराबोर हो गई है। बरसाना की मस्ती अब बिहार के एक गाँव में भी देखने को मिल रही है, पर यहाँ लाठियाँ नहीं, कंधे ही रंग बरसाते हैं। यह सिर्फ सौहार्द नहीं, बल्कि आपसी प्रेम का भी अद्भुत माध्यम बन जाता है। देशज टाइम्स आपको बिहार के एक ऐसे अनूठे गाँव से रूबरू करा रहा है, जहां सदियों से होली का यह निराला रंग जमा रहता है।

- Advertisement -

Bihar Holi: सहरसा का बनगाँव और 200 साल पुरानी ‘घुमौर’ परंपरा

बिहार के सहरसा जिले में स्थित बनगाँव, राधा-कृष्ण की लीलाओं के लिए प्रसिद्ध बरसाना की होली जैसा ही माहौल प्रस्तुत करता है। इस गाँव की पहचान उसकी अनोखी ‘घुमौर होली’ से है, जो लगभग 1810 ईस्वी से चली आ रही एक जीवंत परंपरा है। फर्क सिर्फ इतना है कि जहाँ बरसाना में लठमार होली खेली जाती है, वहीं बनगाँव में लोग एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर रंगों का यह पर्व मनाते हैं। यह एक ऐसा दृश्य होता है, जहाँ हर चेहरा मुस्कान से खिला रहता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पर्व न केवल ग्रामीणों के बीच सौहार्द बढ़ाता है, बल्कि उनकी सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है।

- Advertisement -

बनगाँव की यह ‘घुमौर होली’ सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ के लोग पूरे उत्साह के साथ इस परंपरा को निभाते हैं, जिसमें गाँव के बच्चे से लेकर बूढ़े तक शामिल होते हैं। रंग, गुलाल और पानी के साथ कंधे पर चढ़कर मनाए जाने वाले इस उत्सव की अपनी एक अलग ही छटा है। इस दौरान पूरा गाँव उत्सवमय हो जाता है, और हर तरफ हर्षोल्लास का माहौल रहता है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उसी जोश के साथ मनाई जाती है। सहरसा की होली अब केवल एक क्षेत्रीय उत्सव नहीं, बल्कि पूरे राज्य में इसकी चर्चा होती है।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  Nishant Kumar News: बदलती Bihar Politics में जनता- कार्यकर्ता से सीधा संवाद... क्या है निशांत के मन में? क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित!

आपसी सौहार्द और प्रेम का अद्भुत संगम

यह होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और प्रेम का संदेश देती है। जब लोग एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर होली खेलते हैं, तो यह दिखाता है कि कैसे वे एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं और साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं। यह दृष्य ऐसा होता है, मानो पूरा गाँव एक सूत्र में बंध गया हो। कोई ऊँच-नीच का भेद नहीं, बस रंगों की मस्ती और प्रेम का प्रवाह। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस अनूठी परंपरा ने बनगाँव को एक विशेष पहचान दिलाई है, जहां त्योहारों को मनाने का तरीका भी अपने आप में एक कहानी कहता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परंपरा उन्हें अपने इतिहास और संस्कृति से जोड़े रखती है। होली के इस मौके पर दूर-दूर से लोग इस अद्भुत नजारे को देखने आते हैं। यह एक ऐसा उत्सव है, जो हर साल नई ऊर्जा और उल्लास भर देता है। इस वर्ष भी, बनगाँव में ‘घुमौर होली’ की तैयारी जोर-शोर से चल रही है, और उम्मीद है कि यह पर्व पिछले सभी वर्षों की तरह यादगार रहेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

Samastipur Road Accident: भीषण सड़क हादसे में 2 की मौत, एथलीट और ऑटो ड्राइवर ने तोड़ा दम

Samastipur Road Accident: बिहार के समस्तीपुर में एक दिल दहला देने वाले सड़क हादसे...