Bihar Land Acquisition News: बिहार में विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई है। 3600 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 319 महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं जमीन अधिग्रहण के जटिल पेच में फंसी हुई हैं। इस वजह से कई जिलों में सड़क निर्माण का काम अटका पड़ा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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सड़क निर्माण में देरी क्यों बन रही बड़ी चुनौती?
बिहार में सड़कों का जाल बिछाने की योजनाएं लगातार बाधित हो रही हैं। राज्य सरकार 3600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सड़कों का निर्माण कराने की तैयारी में है, लेकिन 319 परियोजनाओं के लिए अभी तक जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया है। इसके पीछे मुख्य वजह भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया में होने वाली देरी है, जिसके चलते टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो पा रहा है।
सड़क निर्माण के लिए कई बार वन विभाग की क्लीयरेंस भी एक बड़ी बाधा बन जाती है। ऐसे मामलों में जहां वन भूमि का उपयोग होना है, वहां केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति लेने में काफी वक्त लगता है। इससे परियोजनाएं कई सालों तक अटकी रह जाती हैं।
क्या है सरकार की नई रणनीति और उम्मीदें?
राज्य सरकार अब इन लंबित परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए नई रणनीति बना रही है। इसमें भू-अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज करना, वन विभाग से समन्वय स्थापित करना और स्थानीय स्तर पर आने वाली अड़चनों को दूर करना शामिल है। उम्मीद है कि इन प्रयासों से सड़क निर्माण के काम में तेजी आएगी और लाखों लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिल पाएगी।
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इन परियोजनाओं के पूरा होने से न सिर्फ राज्य की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह इन बाधाओं को कितनी जल्दी दूर कर पाती है, ताकि बिहार के विकास की गाड़ी पटरी पर लौट सके।







