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बिहार भूमि रजिस्ट्री: 10 साल बाद बदलेगा ‘ नियम ’ पहले 20 जिलों में फिर…जानिए क्यूं है इतनी हलचल

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बिहार भूमि रजिस्ट्री: जमीन, सिर्फ मिट्टी का ढेर नहीं, बल्कि सपनों का वो कैनवास है जिस पर हर इंसान अपना भविष्य गढ़ता है। और जब इस कैनवास की कीमतें अचानक ऊंची उड़ान भरने लगें, तो हलचल मचना स्वाभाविक है। बिहार में प्रॉपर्टी बाजार अब ऐसी ही एक बड़ी हलचल के मुहाने पर खड़ा है।

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बिहार भूमि रजिस्ट्री: जमीन खरीदने वालों को लग सकता है झटका, 2026 से दोगुने होंगे सर्किल रेट!

बिहार भूमि रजिस्ट्री: क्या है नया प्रस्ताव और क्यों बढ़ेगी कीमत?

बिहार में जमीन या फ्लैट खरीदने की सोच रहे लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। लगभग एक दशक के बाद, राज्य सरकार जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ी न्यूनतम मूल्य दर यानी सर्किल रेट (Minimum Value Rate / MVR) को बढ़ाने की तैयारी में जुट गई है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बिहार में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री दो से तीन गुना तक महंगी हो सकती है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य जमीन की खरीद-बिक्री से राजस्व बढ़ाना और बाजार मूल्य तथा सरकारी दर के बीच लंबे समय से चले आ रहे बड़े अंतर को खत्म करना है।

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मिली जानकारी के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2013 के बाद और शहरी क्षेत्रों में 2016 के बाद एमवीआर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस दौरान, जमीन की बाजार कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं, लेकिन सरकारी दरें वहीं की वहीं बनी हुई थीं। इसी वजह से सरकार को रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी से अपेक्षित आय नहीं मिल पा रही थी। अब मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे एमवीआर की समीक्षा करें और नई दरों की सिफारिश करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला मूल्यांकन समितियां गठित की हैं। ये समितियां शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन के प्रकार, सड़क की चौड़ाई, इलाके के विकास स्तर और मौजूदा बाजार भाव को ध्यान में रखकर नई दरें तय करेंगी। इसके बाद ही सरकार अंतिम निर्णय लेगी कि कहां और कितनी बढ़ोतरी की जाएगी।

सरकार का यह कदम सीधे तौर पर व्यापक जमीन सर्वे अभियान से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में बिहार में बड़े पैमाने पर भूमि सर्वे चल रहा है। पहले चरण में 20 जिलों के 5657 मौजों में और दूसरे चरण में 18 जिलों के 37,384 मौजों में सर्वे शुरू किया गया है। कई गांवों में अंतिम अधिकार अभिलेख भी तैयार किए जा चुके हैं। सरकार चाहती है कि सर्वे पूरा होने के बाद जमीन का वास्तविक मूल्य तय किया जाए और उसी के अनुरूप सर्किल रेट बढ़ाए जाएं, जिससे बिहार रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता आए।

सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों और नए विकसित इलाकों में एमवीआर में सबसे अधिक वृद्धि देखने को मिल सकती है। विशेषकर शहरी क्षेत्रों में, जहाँ बाजार मूल्य और सरकारी दर के बीच भारी अंतर है, वहाँ सर्किल रेट दोगुना या तिगुना होने की संभावना जताई जा रही है। पटना जैसे महानगरों में कृषि भूमि लगभग समाप्त हो चुकी है, लेकिन सरकारी रेट अभी भी बेहद कम बने हुए हैं।

आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?

एमवीआर बढ़ने का सीधा असर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, पटना के किसी इलाके में एक कट्ठा जमीन का मौजूदा सर्किल रेट लगभग 20 लाख रुपये है। यदि सरकार इसे दोगुना करती है, तो खरीदार को कम से कम 40 लाख रुपये के आधार पर स्टांप और रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होगा। इससे रजिस्ट्री पर होने वाला खर्च मौजूदा खर्च से दोगुना से भी ज्यादा हो सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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वित्तीय दृष्टिकोण से देखें तो यह फैसला सरकार के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। निबंधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 7500 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया है। अब एमवीआर बढ़ने के बाद सरकार को प्रत्येक रजिस्ट्री से अधिक स्टांप ड्यूटी और शुल्क प्राप्त होगा, जिससे राजस्व में और अधिक वृद्धि होगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जमीन सर्वे को तेजी से पूरा कर जनवरी 2026 से नई एमवीआर दरें लागू की जा सकती हैं। फिलहाल बैठकों का दौर जारी है और पटना से इसकी शुरुआत होने की संभावना जताई जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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