
एलपीजी गैस संकट: बिहार में शादियों का सीजन अपने चरम पर है, लेकिन रसोई गैस की भारी किल्लत ने खुशी के माहौल में खलल डाल दिया है। व्यावसायिक सिलेंडरों की कमी के कारण कैटरिंग के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिससे दूल्हा-दुल्हन के परिवारों की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है। लोग शादी के कार्ड लेकर गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं, ताकि किसी तरह सिलेंडरों का जुगाड़ हो सके।
कैटरिंग हुई महंगी, थालियों के दाम बढ़े
गैस की कमी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने शादियों की प्रति प्लेट दर में 50 से 100 रुपये तक का इजाफा कर दिया है। पहले जो शाकाहारी प्लेट 650 रुपये में मिल रही थी, अब उसकी कीमत 700 रुपये पार कर गई है। वहीं, मांसाहारी थाली 800 से बढ़कर 900 रुपये की हो गई है। पटना के पॉश इलाकों और बड़े होटलों में तो वेज थाली की दर 1000 से बढ़कर 1200 रुपये तक पहुंच गई है। इस खर्च को काबू करने के लिए अब लोग व्यंजनों की संख्या में कटौती कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
लाइव काउंटर हुए बंद, शादी का मेन्यू सिकुड़ा
गैस की खपत कम करने और लागत बचाने के लिए शादियों में लोकप्रिय डोसा, चाट, जलेबी और पाव-भाजी जैसे लाइव काउंटर हटाए जा रहे हैं। इससे शादी का मेन्यू छोटा होता जा रहा है। इतना ही नहीं, लोग अब हल्दी, मेहंदी और संगीत जैसे प्री-वेडिंग कार्यक्रमों को या तो रद्द कर रहे हैं या उन्हें बेहद सादगी से मना रहे हैं। इन कार्यक्रमों में अब व्यंजनों की लंबी फेहरिस्त की जगह ‘रेडिमेड नाश्ता’ परोसने की तैयारी है, जिससे शादी का मेन्यू और भी सिकुड़ गया है।
एलपीजी गैस संकट: शादी के कार्ड लेकर भटक रहे लोग
एलपीजी गैस वितरक संघ के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग शादी का कार्ड और आवेदन लेकर व्यावसायिक सिलेंडर के लिए गुहार लगा रहे हैं। तेल कंपनियों की ओर से शादियों के लिए अलग से सिलेंडर आवंटित करने का कोई विशेष प्रावधान नहीं है। पटना में खरमास के बाद लगन शुरू होने की वजह से लोग शादी के कार्ड और आवेदन लेकर व्यावसायिक गैस सिलेंडर के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से इसके लिए कोई अलग प्रावधान नहीं किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का अनुमान है कि 15 अप्रैल से 11 जुलाई के बीच शादी के 28 मुहूर्त हैं, जिसमें केवल पटना जिले में ही डेढ़ लाख से ज्यादा सिलेंडरों की जरूरत होगी। यदि यह एलपीजी गैस संकट बरकरार रहा, तो शादियों का रंग और भी फीका पड़ सकता है।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






