Bihar Police Bharti Scam: बिहार में पुलिस भर्ती के नाम पर चल रहे बड़े घोटाले का पटना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। चालक सिपाही भर्ती में अभ्यर्थियों से उगाही करने वाले एक गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। हालांकि, इस गिरोह का मुख्य सरगना अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
पुलिस का मानना है कि मुख्य सरगना के पकड़े जाने के बाद ही यह सामने आ पाएगा कि उसने चालक सिपाही भर्ती के नाम पर कितने अभ्यर्थियों से और कितनी बड़ी रकम वसूली है। यह कार्रवाई 10 सितंबर को दोपहर करीब तीन बजे हुई, जब एयरपोर्ट थाना पुलिस को वेटनरी कॉलेज मैदान में चल रहे वाहन टेस्ट के दौरान एक सक्रिय गिरोह की सूचना मिली।

क्रेटा कार में मिले मैट्रिक-इंटर के मूल प्रमाणपत्र
सूचना मिलते ही पुलिस टीम वेटनरी कॉलेज मैदान पहुंची। वहां एक क्रेटा कार में सवार तीन युवक पुलिस को देखते ही घबरा गए। पुलिस ने उन्हें गाड़ी से बाहर निकाला और कार की तलाशी ली। इस तलाशी के दौरान कार से अखबार में लपेटकर रखे गए मैट्रिक और इंटर के मूल अंकपत्र व प्रमाणपत्र बरामद हुए। ये सभी दस्तावेज गुलशन कुमार नाम के एक अभ्यर्थी के थे।
इसके बाद पुलिस ने क्रेटा कार में सवार दिनेश कुमार (26 वर्ष, निवासी मानपुर भीमनगर, गया), प्रदीप कुमार (26 वर्ष, निवासी निर्मल बिगहा, औरंगाबाद) और कल्याण सिंह यादव (30 वर्ष, निवासी श्रीपुर, जहानाबाद) को तत्काल गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में दिनेश कुमार ने पुलिस को बताया कि अमित कुमार चालक सिपाही भर्ती में अभ्यर्थियों को पास कराने की ‘सेटिंग’ करता था। इसके लिए अभ्यर्थियों से उनके मैट्रिक और इंटर के मूल प्रमाणपत्र लिए जाते थे। अभ्यर्थी से कितनी रकम ली जाएगी, यह बाद में तय किया जाना था। इसी क्रम में गुलशन कुमार ने भी अपने मूल प्रमाणपत्र गिरोह के सदस्यों को दिए थे।
मुख्य सरगना अमित कुमार की तलाश जारी
इस बड़े बिहार पुलिस चालक सिपाही भर्ती घोटाले के खुलासे के बाद अब पुलिस गिरोह के फरार मुख्य सरगना अमित कुमार की सरगर्मी से तलाश कर रही है। अमित कुमार की गिरफ्तारी के बाद ही इस गिरोह के पूरे नेटवर्क, इससे जुड़े अभ्यर्थियों की संख्या और अब तक की गई कथित उगाही की कुल रकम का पूरा खुलासा होने की उम्मीद है। पुलिस इस मामले में आगे की कार्रवाई में जुटी है, ताकि भविष्य में इस तरह के ‘सेटिंग’ के खेल पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।








