Bihar Flood: बिहार में बाढ़ (Bihar Flood) ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. नदियों का जलस्तर बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, खासकर स्कूली बच्चों के लिए रोज स्कूल पहुंचना जानलेवा साबित हो रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो वीडियो इस भयावह स्थिति की हकीकत बयां कर रहे हैं, जहां बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा हासिल करने को मजबूर हैं.


पहला मामला पटना जिले के बाढ़ प्रखंड की एकडंगा पंचायत से सामने आया है. यहां महादलित बस्ती के दर्जनों बच्चे रोज मोगलचक प्राथमिक विद्यालय पहुंचने के लिए महाने नदी पार करते हैं. नदी में बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद अब उनके पास कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा है.
ये बच्चे जुगाड़ से बनाई गई नाव पर बैठकर, खुद ही रस्सी के सहारे उसे खींचते हुए नदी पार करते हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पांचवीं कक्षा का छात्र कुणाल कुमार अपने साथियों को इसी जुगाड़ नाव से नदी पार कराता है. यह दृश्य बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है.
स्कूल जाने का खतरनाक सफर: लोहे के कैप्सूल का सहारा
गंगा नदी में आई बाढ़ का असर महाने नदी पर भी पड़ा है, जिससे उसका जलस्तर भी काफी बढ़ गया है. बाढ़ आने से पहले ग्रामीण और बच्चे पीपा पुल का इस्तेमाल करते थे, लेकिन पानी बढ़ने के साथ ही यह पुल बह गया. अब बच्चों ने पीपा पुल में इस्तेमाल होने वाले लोहे के कैप्सूल का सहारा लेना शुरू कर दिया है. ये बच्चे इन्हीं कैप्सूल के जरिए जान जोखिम में डालकर स्कूल आते-जाते हैं. यह खतरनाक तरीका कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है.
शेखपुरा में भी पानी के बीच स्कूल जाने की मजबूरी
इसी तरह की एक और चिंताजनक तस्वीर बिहार के शेखपुरा जिले के घाटकुसुम्भा प्रखंड के बेलौनी से सामने आई है. यहां हरोहर (हरुहर) नदी में उफान और गंगा नदी के बैकवाटर के कारण टाल क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गया है. मुख्य सड़कें और संपर्क मार्ग पानी में डूब चुके हैं. कई स्कूलों में भी बाढ़ का पानी घुस गया है, लेकिन इसके बावजूद स्कूल बंद नहीं किए गए हैं.
वायरल वीडियो में बच्चे कमर तक पानी में चलकर कतारबद्ध तरीके से स्कूल आते-जाते दिख रहे हैं. पानी के बीच इस तरह बच्चों का आवागमन किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे सकता है, जो उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि बिहार में बाढ़ (Bihar Flood) के कारण बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों दांव पर लगी हैं. प्रशासन को इन बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन के वैकल्पिक इंतजाम करने की तत्काल आवश्यकता है, ताकि वे बिना किसी खतरे के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें और किसी अनहोनी से बचा जा सके.








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