
Panic Button: आप कभी भीड़ भरे इलाके में फंसे हों, अचानक कोई हादसा हो जाए, या किसी आपात स्थिति में तुरंत मदद चाहिए हो, तो बिहार पुलिस का नया प्लान आपके लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। अब राज्य के सार्वजनिक स्थानों पर Panic Button लगाए जाएंगे, जिससे एक क्लिक पर पुलिस, अग्निशमन या एंबुलेंस की मदद मिलेगी।
बिहार पुलिस राज्य में एक ‘नेक्स्ट जनरेशन इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम’ तैयार कर रही है, जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर ‘पैनिक बटन’ लगाए जाएंगे। ये बटन सीधे इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ERSS) डायल 112 नेटवर्क से जुड़े होंगे, जिससे आपातकालीन अलर्ट तुरंत कंट्रोल सेंटर तक पहुंचेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
सार्वजनिक स्थानों पर लगेंगे Panic Button
अपर पुलिस महानिदेशक (तकनीकी सेवा एवं संचार) अमित लोढ़ा ने बुधवार को बताया कि ये Panic Button ऐसे सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाएंगे जहां लोगों की आवाजाही ज्यादा होती है। इनमें पार्क, सड़कें और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्र शामिल हैं। पुलिस पश्चिमी देशों में उपयोग की जा रही उन्नत तकनीकों का भी अध्ययन कर रही है, जिसमें वाहनों में एकीकृत पैनिक बटन भी शामिल हैं। ऐसी प्रणालियां सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आपात स्थितियों में स्वचालित रूप से आपातकालीन केंद्रों को सूचित कर सकेंगी।
एडीजीपी लोढ़ा ने कहा कि बिहार ‘नेक्स्ट जनरेशन इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम’ लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय में सुधार करना और प्रतिक्रिया समय को कम करना है। इस प्रस्तावित प्रणाली की मुख्य विशेषताएं हैं:
- सभी आपातकालीन सेवाओं का एक मंच पर एकीकरण
- तेज़ आपातकालीन प्रतिक्रिया समय
- वास्तविक समय की निगरानी और ट्रैकिंग
- बेहतर तकनीकी बुनियादी ढांचा
फिलहाल, Dial 112 पुलिस आपात स्थितियों, सड़क दुर्घटनाओं, आग, आपदाओं और अन्य संकट स्थितियों से संबंधित एकीकृत आपातकालीन सहायता प्रदान करता है। इस सेवा को मोबाइल फोन कॉल, एसएमएस एसओएस अलर्ट और ERSS ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से मुफ्त में एक्सेस किया जा सकता है।
डायल 112 की औसत प्रतिक्रिया अवधि 11 मिनट से कम
लोढ़ा ने बताया कि ERSS Dial 112 वर्तमान में औसतन 11 मिनट से भी कम समय में आपात स्थितियों पर प्रतिक्रिया दे रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य अगले दो महीनों में नई तकनीकों और अतिरिक्त जनशक्ति की तैनाती के माध्यम से प्रतिक्रिया समय को और कम करना है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, Dial 112 को प्रतिदिन औसतन 6,500 कॉल प्राप्त होती हैं। 6 जुलाई, 2022 को लॉन्च होने के बाद से, इस सेवा ने बिहार में लगभग 55 लाख कॉलों को संभाला है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
आपातकालीन कॉलों का विश्लेषण
डायल 112 द्वारा लॉन्च के बाद से संभाली गई घटनाओं के प्रकार का विवरण पुलिस ने साझा किया है:
- घरेलू हिंसा और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराध से संबंधित 4,69,347 कॉल
- स्थानीय विवादों और हिंसक झड़पों से जुड़ी 29,97,411 कॉल
- सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित 2.39 लाख से अधिक कॉल
- आग लगने की घटनाओं से संबंधित 1.13 लाख से अधिक कॉल
- अन्य आपात स्थितियों और सहायता अनुरोधों से जुड़ी 17.73 लाख से अधिक कॉल
अधिकारियों ने बताया कि आपातकालीन सेवा ने जीवन और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़े कई मामलों में त्वरित सहायता प्रदान की है।
लोढ़ा ने यह भी घोषणा की कि बिहार के आपातकालीन प्रतिक्रिया बुनियादी ढांचे के विस्तार और आधुनिकीकरण के हिस्से के रूप में गया में एक मिरर साइट इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर स्थापित किया जाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







