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बिहार सरकार का पहला महीना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदभार संभालते ही बिहार की दिशा और दशा बदलने का संकल्प लिया था। अब उनके कार्यकाल का पहला महीना पूरा हो चुका है, और इस दौरान सरकार ने शहरी विकास, महिला सुरक्षा, शिक्षा और शिकायत समाधान से जुड़े कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। आइए जानते हैं क्या हैं ये प्रमुख निर्णय और इनसे बिहार की जनता को क्या लाभ मिलेगा।
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नई सरकार का दावा है कि इन कदमों का मकसद ‘समृद्ध बिहार’ की दिशा में तेज गति से काम करना है। पटना से लेकर पंचायत स्तर तक नई योजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ सख्त रुख भी शामिल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
शहरी विकास और महिला सुरक्षा के लिए पहल
- सैटेलाइट टाउनशिप: बिहार के 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप की रूपरेखा तैयार की गई है। इन टाउनशिप में सुनियोजित तरीके से कॉलोनियां बसाई जाएंगी, जिनमें बाजार, आवासीय क्षेत्र, चौड़ी सड़कें और हरियाली का विशेष ध्यान रखा जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल यह योजना शहरी दबाव को कम करेगी और लोगों को बेहतर जीवन का लाभ देगी। इसमें सासाराम को जोड़ने का भी प्रस्ताव है।
- पुलिस दीदी योजना: सम्राट सरकार की ‘पुलिस दीदी योजना’ महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा बढ़ाने तथा पुलिस व समाज के बीच विश्वास मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके लिए 1500 स्कूटी महिला पुलिसकर्मियों के लिए खरीदने का निर्णय लिया गया है। कॉलेज और स्कूलों के सामने ‘पुलिस दीदी’ की तैनाती से रोड साइड रोमियो और महिला अपराधों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
शिकायत निवारण, शिक्षा और बिहार सरकार का पहला महीना
- सहयोग की त्रिवेणी: सुशासन को मजबूती देने और जनता के हित में सरकार के उत्तरदायित्व को ध्यान में रखकर ‘सहयोग की त्रिवेणी’ शुरू की गई है। इसमें सहयोग हेल्पलाइन (1100), सहयोग पोर्टल (sahyog.bihar.gov.in) और पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर शामिल हैं। ये शिविर हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को आयोजित होंगे, जहाँ ब्लॉक, थाना और अंचल की शिकायतों की सुनवाई होगी। सहयोग पोर्टल पर सरकारी योजना से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए 30 दिन का लक्ष्य तय किया गया है। यदि 30 दिनों में शिकायत का निपटारा नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी का निलंबन तक हो सकता है।
- शिक्षा क्षेत्र में बड़े निर्णय: सम्राट सरकार ने अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। सभी जिला स्कूलों और प्रत्येक प्रखंड के चयनित एक उच्च माध्यमिक विद्यालय को ‘मॉडल स्कूल’ के रूप में विकसित करने के लिए ₹800 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही, डिग्री कॉलेज रहित 208 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए ₹104 करोड़ (प्रति कॉलेज ₹50 लाख) स्वीकृत किए गए हैं, जिससे कुल 9152 पदों का सृजन होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
पारदर्शिता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में
- निजी विद्यालयों पर नकेल: निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी पहल की गई है। अब निजी विद्यालयों को फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। मनमानी फीस बढ़ोतरी और अनावश्यक शुल्क पर रोक लगेगी। छात्रों के परिजनों को किताबें-यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदने की स्वतंत्रता होगी। फीस बकाया होने पर भी छात्रों को परीक्षा/परिणाम से वंचित नहीं किया जाएगा। आदेश का उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई तय है।
- बिहारी संवेदकों को प्राथमिकता: ₹50 करोड़ तक के राज्याधीन सिविल कार्यों के लिए राज्य स्तरीय ठेकेदारों (संवेदकों) को प्राथमिकता देने के लिए बिहार लोक निर्माण संहिता में संशोधन किया गया है। अब ₹50 करोड़ तक के कार्यों के ठेके बिहारियों को मिलेंगे, जिससे राज्य के लोगों को काम के अधिक अवसर मिलेंगे।
- ई-निबंधन व्यवस्था लागू: जमीन और संपत्ति के रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह पेपरलेस बनाने के लिए ई-निबंधन सिस्टम लागू किया गया है। यह भ्रष्टाचार कम करने, समय बचाने और पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक होगा। इसके साथ ही, 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर पर रजिस्ट्री की सुविधा देने का फैसला लिया गया है, जिससे उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
- अपराध पर जीरो टॉलरेंस: इन सभी जन कल्याणकारी योजनाओं के अलावा, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संगीन अपराधों (हीनियस क्राइम) के मामलों में पुलिस को जीरो टॉलरेंस बरतने का निर्देश दिया है। इस क्रम में एनकाउंटर की घटनाएं भी सामने आई हैं। इन जन कल्याणकारी योजनाएं का सीधा लाभ प्रदेश की जनता को मिलेगा और यह बिहार सरकार का पहला महीना दर्शाता है कि सरकार सुशासन की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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