Bihar Startup: बिहार के युवाओं के लिए एक नई सुबह का आगाज हुआ है। अब वे नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे। पटना में ‘द भारत प्रोजेक्ट’ के तहत ‘शुरू कर’ आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसका सीधा मकसद लाखों युवाओं को अपना उद्यम खड़ा करने के लिए प्रेरित करना है। यह पहल उन्हें स्थानीय समस्याओं को व्यावसायिक अवसरों में बदलने का मंच प्रदान करेगी।
लाखों नए विचार और हजारों स्टार्टअप: ‘शुरू कर’ के महत्वाकांक्षी लक्ष्य
योरस्टोरी की इस महत्वपूर्ण पहल को डीपीआईआईटी और स्टार्टअप इंडिया का भी सहयोग मिला है। अगले 18 महीनों के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए गए हैं। इस अवधि में 10 लाख व्यावसायिक विचारों को जुटाया जाएगा, एक लाख नए उद्यम स्थापित करने में मदद मिलेगी, और अपने फंड से कम से कम 5,000 स्टार्टअप को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
पटना के राजेंद्रनगर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी में इस आंदोलन का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा, योरस्टोरी की संस्थापक एवं सीईओ श्रद्धा शर्मा सहित कई उद्यमी, विद्यार्थी और राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए युवा मौजूद रहे। कार्यक्रम में युवाओं को अपने जिले की जरूरतों को पहचानकर उन्हें कारोबार के अवसर में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
उद्यमिता का नया अध्याय: हर जिले से निकलेंगे भविष्य के कारोबारी
योरस्टोरी की संस्थापक श्रद्धा शर्मा ने लगभग 17 वर्षों तक उद्यमियों की कहानियों को सामने लाने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने इस दौरान महसूस किया कि केवल सफल कारोबारियों की गाथाएं सुनाना पर्याप्त नहीं है; अगली पीढ़ी के उद्यमियों को तैयार करने में भी सक्रिय सहयोग देना अत्यंत आवश्यक है।
“देश में प्रतिभा और कुछ नया करने का उत्साह हर जगह मौजूद है, लेकिन अवसरों तक पहुंच सभी क्षेत्रों में समान नहीं है। ‘शुरू कर’ इसी अंतर को कम करने का प्रयास है।”
शर्मा ने युवाओं से आह्वान किया कि उन्हें अपना काम शुरू करने के लिए हर सवाल का जवाब पहले से जानने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, शुरुआत करना और आगे बढ़ते हुए सीखना ही उद्यमिता का वास्तविक हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य के उद्यमी केवल बड़े महानगरों से ही नहीं, बल्कि पटना, गया, दरभंगा और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों से भी सामने आने चाहिए। यह पहल युवाओं को सही समस्या चुनने से लेकर अपने पहले ग्राहक तक पहुंचने में सहयोग देगी।
संघर्ष और सफलता: बिहार में बदलता कारोबारी माहौल
बिहार सरकार के मंत्री नीतीश मिश्रा ने अपने संबोधन में उद्यमियों के संघर्ष और शुरुआती चुनौतियों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि लोग अक्सर किसी कारोबारी की अंतिम सफलता को देखते हैं, लेकिन उसके पीछे की कड़ी मेहनत और तमाम कठिनाइयों पर कम ध्यान देते हैं।
“राज्य को लेकर बनी धारणाओं से अलग जमीन पर कई बदलाव हो रहे हैं। सरकार उद्यमिता और नए कारोबार को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास कर रही है।”
मंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि वे चुनौतियों को अपने रास्ते की बाधा मानकर रुकें नहीं, बल्कि उनका डटकर सामना करें। उन्होंने बिहार में तेजी से बदलते कारोबारी माहौल का भी जिक्र किया। सरकार उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, और युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।
स्थानीय समस्याओं का स्थायी समाधान: ‘शुरू कर’ का जिला-केंद्रित मॉडल
‘शुरू कर’ आंदोलन की एक प्रमुख विशेषता इसका जिला-केंद्रित मॉडल है। यह मॉडल युवाओं को अपने स्थानीय क्षेत्रों की समस्याओं की पहचान करने और उनके लिए व्यावसायिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा। उदाहरण के लिए, कृषि उत्पादों के भंडारण, स्थानीय परिवहन व्यवस्था, शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच या छोटे कारोबारियों की बाजार तक पहुंच जैसी समस्याओं को उद्यम का आधार बनाया जा सकता है। ये सिर्फ संभावित क्षेत्र हैं, जबकि वास्तविक विचार स्थानीय जरूरतों और प्रतिभागियों की रचनात्मकता पर निर्भर करेंगे।
इस पहल के तहत प्रतिभागियों को एक एआई को-पायलट की सुविधा भी मिलेगी। यह टूल उनके विचारों को स्पष्ट करने, व्यावसायिक दिशा तय करने और अगले कदमों को समझने में सहायक होगा। इसके अतिरिक्त, अनुभवी उद्यमियों से मेंटरशिप भी प्रदान की जाएगी। उद्देश्य केवल नए विचार पैदा करना नहीं है, बल्कि उन्हें बाजार की वास्तविक जरूरतों के अनुसार विकसित करना और शुरुआती ग्राहकों तक पहुंचने में मदद करना है। युवाओं को स्थानीय बाजार, संभावित साझेदारों और अपने जिले में उपलब्ध कारोबारी अवसरों से जोड़ा जाएगा। इससे बड़े शहरों की ओर पलायन कम होने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित होने की संभावना है।
‘शुरू कर चैलेंज’ और आगे की राह: 10 लाख उद्यमियों का लक्ष्य
‘शुरू कर’ के पहले 18 महीनों के लिए तय किए गए लक्ष्यों के साथ, ‘शुरू कर चैलेंज’ की भी घोषणा की गई है। इसके तहत देश की कुछ बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विचार आमंत्रित किए गए हैं। इस चैलेंज का मकसद युवाओं को ऐसे मुद्दों पर काम करने के लिए प्रेरित करना है, जो लोगों की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ एक टिकाऊ कारोबार का आधार भी बन सकें।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह पहल मौजूदा सरकारी व्यवस्था के माध्यम से ही काम करेगी; इसके लिए अलग से कोई नई सरकारी योजना या अतिरिक्त धन की मांग नहीं की गई है। डीपीआईआईटी और स्टार्टअप इंडिया का सहयोग इस योजना को देश के विभिन्न जिलों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम के दौरान डब्ल्यूओयू आई इंडिया के सीईओ अमर दीक्षित और इनयूनिटी के सह-संस्थापक एवं सीईओ जॉनसन टेलिस ने मुख्य भाषण दिए, जिसके बाद उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए।
‘द भारत प्रोजेक्ट’ योरस्टोरी की व्यापक पहल है, जिसका लक्ष्य उद्यमिता को देश के हर जिले तक पहुंचाना है। इसका दीर्घकालिक उद्देश्य 10 लाख उद्यमियों को तैयार करना और 10,000 ऐसे स्टार्टअप को खड़ा करना है, जिनमें विकास की अपार संभावनाएं हों। योरस्टोरी, जिसकी स्थापना श्रद्धा शर्मा ने 2008 में की थी, अब तक 2 लाख से अधिक संस्थापकों की कहानियां प्रकाशित कर चुकी है। ‘द भारत प्रोजेक्ट’ के माध्यम से अब सिर्फ कहानियां साझा नहीं की जाएंगी, बल्कि नए कारोबार शुरू करने की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग दिया जाएगा।
यह आंदोलन बिहार के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है। स्थानीय प्रतिभा को पहचानकर और उन्हें सही दिशा देकर, ‘शुरू कर’ प्रदेश में एक मजबूत उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा, जिससे आत्मनिर्भर बिहार का सपना साकार हो सकेगा।







