Bihar Teachers: बिहार के शिक्षकों ने सातवें वेतनमान की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर एक बड़ा डिजिटल अभियान शुरू किया है। इस मुहिम ने देखते ही देखते शिक्षकों के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। बिहार शिक्षक मंच के आह्वान पर सुबह 11 बजे शिक्षकों ने हैशटैग #BiharTeachersNeed7thPay के साथ ट्वीट करना शुरू किया। दावा किया गया कि कुछ ही मिनटों में यह हैशटैग दुनिया भर में नंबर-1 पर ट्रेंड करने लगा।
इस डिजिटल मुहिम के जरिए शिक्षकों ने सीधे मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अपनी मांग रखी है। उनका स्पष्ट कहना है कि अब उन्हें कोरे आश्वासन नहीं, बल्कि सातवें वेतनमान का वास्तविक लाभ चाहिए। अपनी मांगों के समर्थन में शिक्षकों ने तर्क दिया है कि जब उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा मिल गया है, तो फिर वेतनमान में क्यों देरी की जा रही है।
शिक्षक दिवस पर बिहार के शिक्षकों की बड़ी मांग: क्या सरकार देगी सातवें वेतनमान का तोहफा?
Bihar Teachers: शिक्षक दिवस नजदीक आते ही बिहार के शिक्षकों ने सातवें वेतनमान को लागू करने की मांग को लेकर एक डिजिटल अभियान छेड़ दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर #BiharTeachersNeed7thPay हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। शिक्षक राज्य सरकार से इस मुद्दे पर जल्द से जल्द ठोस निर्णय लेने का आग्रह कर रहे हैं। यह अभियान इस सवाल को भी उठा रहा है कि राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बावजूद शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है।
डिजिटल मुहिम से सरकार पर दबाव
सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने के बजाय, शिक्षकों ने अपनी मांग को उजागर करने के लिए सोशल मीडिया को चुना है। #BiharTeachersNeed7thPay हैशटैग के माध्यम से वे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री सहित वरिष्ठ सरकारी नेताओं को टैग कर रहे हैं, और इस पर तत्काल निर्णय लेने की अपील कर रहे हैं। शिक्षक विशेष रूप से 5 सितंबर, यानी शिक्षक दिवस की ओर देख रहे हैं, उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उस दिन सातवें वेतनमान के संबंध में कोई घोषणा करेगी। शिक्षक नेता आनंद कौशल सिंह ने भी यह मुद्दा उठाया है, यह सवाल करते हुए कि राज्यकर्मी का दर्जा प्राप्त शिक्षकों को सातवें वेतनमान के अनुरूप लाभ क्यों नहीं मिल रहा है। शिक्षकों का तर्क है कि उनकी जिम्मेदारियों में छात्रों को शिक्षित करना और अगली पीढ़ी को तैयार करना शामिल है, और इसलिए उनकी मांग को एक अतिरिक्त लाभ के बजाय पेशेवर अधिकारों और गरिमा के मामले के रूप में देखा जाना चाहिए।
शिक्षक नेता आनंद कौशल सिंह ने कहा, “जब हमें राज्यकर्मी का दर्जा मिल गया है, तो सातवें वेतनमान का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है? यह हमारे पेशेवर अधिकार का मामला है।”
शिक्षक दिवस: सम्मान या कार्रवाई का दिन?
इस अभियान ने इस साल बिहार में शिक्षक दिवस समारोह में एक नया आयाम जोड़ दिया है। जहां 5 सितंबर पारंपरिक रूप से शिक्षकों का सम्मान करने और उनके योगदान को पहचानने पर केंद्रित होता है, वहीं शिक्षक इस अवसर का उपयोग एक ठोस नीतिगत निर्णय की तलाश के लिए कर रहे हैं। अब मुख्य सवाल यह है कि क्या सरकार 5 सितंबर को इस डिजिटल अभियान का जवाब कोई घोषणा करके देगी या यह मुद्दा केवल चर्चाओं और मांगों तक ही सीमित रहेगा।
कंप्यूटर शिक्षकों को अन्य विज्ञान विषय पढ़ाने का निर्देश
इस बीच, बिहार के स्कूलों में शिक्षकों से जुड़ा एक और फैसला चर्चा में है। पटना जिले के उन स्कूलों में जहां कंप्यूटर साइंस के लिए कोई छात्र नामांकित नहीं है, कंप्यूटर शिक्षकों को अन्य विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए कहा जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी ने इस व्यवस्था के संबंध में स्कूल प्राचार्यों और संबंधित शिक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। निर्देश के अनुसार, कक्षा 9 और 10 में कंप्यूटर शिक्षकों को सामान्य विज्ञान पढ़ाने के लिए कहा जा सकता है, यदि कंप्यूटर साइंस के लिए कोई छात्र नामांकित नहीं है। कक्षा 11 और 12 के लिए, वे स्कूल की आवश्यकताओं के आधार पर भौतिकी, रसायन विज्ञान या गणित पढ़ा सकते हैं। इस कदम का उद्देश्य उन स्कूलों में शिक्षकों की सेवाओं का उपयोग करना है जहां कंप्यूटर साइंस कक्षाओं की मांग नहीं है।
तकनीकी सहायता और डिजिटल सहयोग भी देंगे कंप्यूटर शिक्षक
कंप्यूटर शिक्षकों की जिम्मेदारियां केवल कक्षा शिक्षण तक सीमित नहीं होंगी। वे डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन प्रणालियों, जिनमें यू-डीआईएसई प्लस और ई-शिक्षककोष शामिल हैं, के लिए अन्य शिक्षकों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण भी प्रदान करेंगे। जिन स्कूलों में समर्पित आईसीटी प्रशिक्षक नहीं हैं, वहां कंप्यूटर शिक्षक कंप्यूटर प्रयोगशालाओं, उपकरणों और अन्य डिजिटल संसाधनों के संचालन और रखरखाव के लिए भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
शिक्षकों द्वारा बेहतर वेतन की मांग और उनकी जिम्मेदारियों के लगातार बढ़ने के साथ, सातवें वेतनमान का मुद्दा शिक्षक दिवस से पहले चर्चा का एक प्रमुख बिंदु बना रहेगा। बिहार के शिक्षकों के लिए 5 सितंबर सिर्फ प्रशंसा का दिन नहीं, बल्कि एक ठोस सरकारी निर्णय की उम्मीद का दिन भी बन सकता है।
शिक्षकों का सवाल: राज्यकर्मी का दर्जा मिला, फिर वेतनमान क्यों नहीं?
शिक्षक नेताओं का कहना है कि सरकार ने सक्षमता परीक्षा और बीपीएससी परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों को सरकारी सेवा में शामिल कर राज्यकर्मी का दर्जा दिया है। इसके बावजूद, उन्हें अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह केंद्रीय वेतनमान के अनुरूप सातवें वेतनमान का लाभ नहीं मिल रहा है। शिक्षकों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि वे सम्मानजनक वेतन से वंचित हैं।
शिक्षक नेता अश्विनी पांडेय ने कहा, ‘शिक्षक पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ स्कूलों में काम कर रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षकों को लेवल-6 से लेवल-8 तक का लाभ मिलना चाहिए।’
शिक्षकों का तर्क है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन के साथ-साथ दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी शिक्षकों को सातवें वेतनमान के अनुरूप पे-लेवल का लाभ मिल रहा है। जबकि बिहार में शिक्षकों के लिए एक अलग वेतन संरचना तैयार की गई है, जिससे वे खुद को दूसरे राज्यों के शिक्षकों की तुलना में आर्थिक रूप से पीछे महसूस कर रहे हैं।
वेतन के साथ इन मुद्दों पर भी है नाराजगी
शिक्षकों की मांगें केवल वेतन तक ही सीमित नहीं हैं। वे महंगाई के अनुरूप वेतन बढ़ाने, दूसरे राज्यों के बराबर वेतनमान देने और स्थानांतरण प्रक्रिया में भी राहत की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों के मुताबिक, स्थानांतरण के लिए नियमित शिक्षकों की तरह 30 स्कूलों के चयन का प्रावधान किया गया है, जिसमें बदलाव की जरूरत है।
इसके अतिरिक्त, शिक्षकों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था, नई पेंशन योजना और सेवा शर्तों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सहायक शिक्षक के पुराने संवर्ग को समाप्त करके विशिष्ट शिक्षक और विद्यालय अध्यापक जैसे नए संवर्ग बनाए गए हैं, लेकिन इन संवर्गों में भी वेतन और अन्य लाभों को लेकर स्पष्टता और समानता नहीं है। यह डिजिटल अभियान सरकार पर दबाव बनाने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है, ताकि उनकी लंबित मांगों पर जल्द कार्रवाई हो सके।








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