Bihar Flat Mutation: बिहार के फ्लैट खरीदारों के लिए एक अच्छी खबर सामने आ रही है। अपार्टमेंट के फ्लैटों की जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) करीब सवा साल बाद फिर से शुरू होने वाला है। संभावना जताई जा रही है कि सितंबर 2026 से यह प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकती है, जिससे हजारों संपत्ति मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी ला चुका है। यह सॉफ्टवेयर अब अपने अंतिम चरण में है, जिसका उद्देश्य फ्लैटों की जमीन के दाखिल-खारिज को स्पष्ट, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सही बनाना है। इस नई व्यवस्था से फ्लैटों को लेकर होने वाले विवादों पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
क्यों लगी थी दाखिल-खारिज पर रोक?
बिहार में अपार्टमेंट की जमीन के फ्लैटधारियों के नाम दाखिल-खारिज पर अप्रैल 2025 से रोक लगा दी गई थी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए अपार्टमेंट की जमीन का फ्लैटधारियों के नाम दाखिल-खारिज, नामांतरण और जमाबंदी सृजन की कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से रोकने को कहा था। इस रोक के चलते फ्लैट खरीद चुके लोगों को अपनी जमीन का रिकॉर्ड अपने नाम कराने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
विभाग के अनुसार, ‘बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम 2011’ और ‘नियमावली 2012’ में अपार्टमेंट की जमीन का सीधे फ्लैटधारियों के नाम दाखिल-खारिज करने की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। इसके अतिरिक्त, विभागीय सॉफ्टवेयर में भी इसके लिए आवश्यक प्रावधान मौजूद नहीं थे। इसी वजह से अलग-अलग अंचलों में फ्लैट की जमीन के दाखिल-खारिज को लेकर भिन्न-भिन्न तरीके अपनाए जा रहे थे, जिससे प्रक्रिया में एकरूपता नहीं थी।
नई व्यवस्था से क्या होगा फायदा?
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग इस समस्या का समाधान निकालने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिहार में फ्लैट की जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को एक समान और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। यह तकनीकी खामियों को दूर करके ऐसी व्यवस्था तैयार करेगा, जिससे फ्लैट की जमीन के रिकॉर्ड को सही तरीके से दर्ज किया जा सके।
इससे भविष्य में फ्लैट की मिल्कियत और जमीन के रिकॉर्ड को लेकर होने वाले विवादों पर भी अंकुश लगेगा। फ्लैट खरीदारों को दाखिल-खारिज के लिए अंचल कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिलेगी, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बचेगा। यह कदम संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया में विश्वास और सुविधा बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।







