Bihar Tender Scam: बिहार के सबसे बड़े टेंडर घोटाले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने बड़ा एक्शन लिया है। इस मामले में कई भ्रष्ट अधिकारियों के तार ठेकेदार रिशुश्री से जुड़े होने का खुलासा हुआ है। SVU की टीम ने इस सनसनीखेज घोटाले में तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक चर्चित आईएएस अधिकारी संजीव हंस अभी भी फरार चल रहे हैं।
एसवीयू की जांच में मुमुक्षु चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह के रिशुश्री के साथ गहरे संबंध सामने आए हैं। बुधवार को संजीव हंस अपने शास्त्रीनगर स्थित आवास और पुराना सचिवालय स्थित राजस्व पर्षद कार्यालय में हुई छापेमारी के दौरान लापता पाए गए। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को तेज कर दिया है।
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रिशुश्री के साथ भ्रष्ट अधिकारियों का गहरा गठजोड़
जांच में पता चला है कि टेंडर घोटाले में गिरफ्तार किए गए तीनों अधिकारियों का ठेकेदार रिशुश्री के साथ मजबूत गठजोड़ था। आरोप है कि उन्होंने टेंडर देने के बदले रिशुश्री के कई एहसान माने और बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया। एसवीयू की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि इन अधिकारियों ने रिशुश्री के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा।
सरकारी टेंडर और उसकी गोपनीयता का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर सरकारी राशि का गबन किया गया। IAS Sanjeev Hans News के संदर्भ में भी, यह खुलासा हुआ है कि रिशुश्री ने जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग और बीएमएसआईसीएल सहित कई विभागों में अपनी कंपनियों के पक्ष में ठेके हासिल करने के लिए सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी थी।
तीनों गिरफ्तार अधिकारियों की भूमिका का खुलासा
एसवीयू ने बताया कि सीतामढ़ी डीआरडीए के तत्कालीन निदेशक मुमुक्षु कुमार चौधरी पर आरोप है कि रिशुश्री ने उन्हें सीतामढ़ी नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलवाया। इस पद पर रहते हुए मुमुक्षु चौधरी ने ठेकेदार के सहयोग से शहरी विकास की परियोजनाओं के ठेके अपनी मनपसंद कंपनी को दिलाए। सहरसा नगर आयुक्त रहते हुए भी मुमुक्षु चौधरी ने रिशुश्री से रिश्वत लेकर कई शहरी विकास परियोजनाएं उसके पक्ष में की।
एसवीयू के अनुसंधान में रिशुश्री ने अपने बयान में बताया कि वह भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता तारिणी दास को विपत्र पास कराने के एवज में 3.5 प्रतिशत कमीशन देता था। वहीं, कार्यपालक अभियंता उमेश सिंह पर नगर विकास एवं आवास विभाग और बुडको में पदस्थापन के दौरान ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन कार्य और अन्य ठेकों में एक प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप है।
आईएएस संजीव हंस की तलाश और अन्य अभियुक्त
इस बड़े घोटाले में नामजद अभियुक्तों में शामिल चर्चित आईएएस अधिकारी संजीव हंस अभी भी एसवीयू की गिरफ्त से बाहर हैं। बुधवार को उनके शास्त्रीनगर स्थित आवास और पुराना सचिवालय स्थित राजस्व पर्षद कार्यालय में छापेमारी की गई, लेकिन वह फरार मिले। एसवीयू ने बताया कि कांड संख्या 05/25 में चार नामजद अभियुक्त हैं, जिनमें ठेकेदार रिशु श्री और उसके सहयोगी संतोष कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है।
शेष दो नामजद अभियुक्त आईएएस संजीव हंस और रिशु श्री की कंपनी ‘मातृस्वा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक पवन कुमार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं। इस मामले में बिहार सरकार के कई अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।
ठेकेदार रिशु श्री को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी जोरों पर है। गुरुवार को अभियुक्तों की पेशी के दौरान रिमांड के लिए अर्जी दी जा सकती है। एसवीयू की योजना है कि रिशु श्री के बाद एक-एक कर अन्य अभियुक्तों को भी रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जाए।
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मुमुक्षु कुमार चौधरी वर्ष 1999 में बिहार सरकार की सेवा में आए थे। उन्होंने ग्रामीण विकास, नगर विकास एवं आवास, सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग में काम किया है। साथ ही वे कई जिलों में वरीय उप समाहर्ता, प्रखंड विकास पदाधिकारी, डीआरडीए निदेशक, नगर आयुक्त और उप नगर आयुक्त के पदों पर भी रहे हैं।
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इस घोटाले से जुड़े अधिकारियों पर रिशुश्री से अनुचित लाभ लेकर मनमाने ठेके देने और उसके भ्रष्ट कार्यों को बढ़ावा देने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी इनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई प्रमाण मिले हैं, साथ ही एसवीयू ने भी इन पर आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज कर रखा है, जिसकी जांच अभी जारी है।






