Bihar Teachers: बिहार में शिक्षा विभाग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सतर्कता अन्वेषण ब्यूरो की जांच में 3,000 से अधिक नियोजित शिक्षकों को फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने का दोषी पाया गया है। इस बड़े खुलासे के बाद अधिकारियों ने अब तक 1,830 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं, और इन शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सतर्कता अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने विजिलेंस जागरूकता सप्ताह के दौरान बताया कि लगभग 3.5 लाख शिक्षकों के 6.7 लाख शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया गया है।
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फर्जीवाड़े का पर्दाफाश और FIRs
यह व्यापक सत्यापन अभियान वर्ष 2006 से 2015 के बीच सरकारी स्कूलों में नियुक्त किए गए नियोजित शिक्षकों की भर्ती में अनियमितताओं के आरोपों के बाद शुरू किया गया था। पटना उच्च न्यायालय ने सतर्कता अन्वेषण ब्यूरो को नियुक्त शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता की जांच करने का निर्देश दिया था। इसके बाद ब्यूरो ने राज्य के सभी जिलों में शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की गहनता से जांच की। जांच के दौरान कुल 3,035 व्यक्तियों की पहचान की गई है, जिन्होंने फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया था।
बर्खास्तगी और कानूनी कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि यह जांच देश भर के 378 शिक्षा बोर्डों और विश्वविद्यालयों के साथ-साथ नेपाल से जारी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को भी कवर करती है, जो इसे राज्य द्वारा किए गए सबसे बड़े प्रमाण-पत्र सत्यापन अभ्यानों में से एक बनाता है। फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग कर नियुक्ति पाने वाले बिहार टीचर्स की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच में पहचान किए गए लोगों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई भी अपेक्षित है।
निगरानी तंत्र का विस्तार
बिहार सरकार अपने भ्रष्टाचार विरोधी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि राज्य के सभी जिलों में सतर्कता थाने स्थापित किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, सतर्कता अन्वेषण ब्यूरो ने इस प्रस्ताव पर काम शुरू कर दिया है, जिसे जल्द ही सतर्कता विभाग को मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। ब्यूरो ने प्रत्येक प्रमंडलीय मुख्यालय में क्षेत्रीय सतर्कता कार्यालय स्थापित करने का भी प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में, सतर्कता अदालतें केवल पटना, भागलपुर और मुजफ्फरपुर में संचालित होती हैं, और सरकार सतर्कता मामलों के त्वरित निपटान के लिए इनकी संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही है।
यह कार्रवाई न केवल शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह सरकार के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को भी दर्शाती है। भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार लगातार अपने निगरानी तंत्र को मजबूत कर रही है।












