
Bihar Weather: अगले 3 घंटों में दरभंगा, मधेपुरा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, सहरसा, समस्तीपुर, शिवहर, सीतामढी, सुपौल, वैशाली में कुछ स्थानों पर बिजली गिरने के साथ गरज के साथ बारिश होने की संभावना है।
इससे पहले, रविवार को बिहार के मौसम ने अचानक करवट ली। उत्तर और पूर्वी बिहार के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने भयंकर तबाही मचाई है, जिससे चार लोगों की जान चली गई और किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। वहीं, दक्षिणी बिहार अभी भी भीषण गर्मी की चपेट में है।
रविवार को बिहार में मौसम ने ऐसा मिजाज बदला कि लोगों को भीषण गर्मी से थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन कई जिलों में इस Bihar Weather ने तबाही भी मचाई। ठनका गिरने और दीवार ढहने जैसी घटनाओं में कुल चार लोगों की मौत हो गई। इसमें कटिहार जिले में आंधी-बारिश के दौरान बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हुई, जबकि अररिया में एक पुरानी दीवार गिरने से एक वृद्धा की जान चली गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के मुताबिक, उत्तर और पूर्वी बिहार के खेतों में खड़ी मक्का और अन्य रबी फसलों को भारी फसल नुकसान हुआ है। कई जगहों पर ओले इतने बड़े गिरे कि खेतों में तैयार फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गईं, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं।
जानलेवा आंधी-बारिश और ओलावृष्टि
उत्तर और पूर्वी बिहार के अररिया, कटिहार, पूर्णिया, सुपौल, मधुबनी, सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण जैसे जिलों में रविवार को अचानक तेज आंधी चली, जिसकी रफ्तार 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। इन इलाकों में भारी बारिश के साथ बड़े-बड़े ओले भी गिरे, जिसने खेतों को उजाड़ दिया और कच्चे मकानों को भी क्षति पहुंचाई।
बिहार मौसम का दोहरा रवैया: उत्तर में राहत, दक्षिण में तपिश
एक तरफ जहां बिहार के उत्तरी और पूर्वी हिस्से में बारिश ने तापमान गिराकर लोगों को गर्मी से राहत दिलाई, वहीं दूसरी ओर दक्षिणी बिहार में गर्मी का प्रकोप यथावत जारी रहा। पटना का अधिकतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। इसके उलट, गया, डेहरी और भभुआ जैसे शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया, जहां लोगों को अभी भी लू और तेज धूप का सामना करना पड़ रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
कृषि पर कहर: किसानों की बढ़ी चिंता
आंधी, बारिश और खासकर ओलावृष्टि से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। मक्के की फसल को सबसे ज्यादा क्षति पहुंची है, जो कटाई के लिए तैयार थी। इसके साथ ही गेहूं और अन्य दलहनी फसलों को भी नुकसान हुआ है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह अचानक आया मौसम का बदलाव किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि फसल नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।







