
Chandranath Rath murder case: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए रहे चंद्रनाथ रथ की हत्या का मामला सुलझने लगा है। पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड में बक्सर और अयोध्या से तीन आरोपियों को धर दबोचा है। टोल प्लाजा पर किए गए एक डिजिटल भुगतान ने पुलिस के लिए बड़ा सुराग खोला, जिसके बाद यह अहम गिरफ्तारियां संभव हो पाईं।
टोल प्लाजा के डिजिटल भुगतान से खुला रास्ता
पश्चिम बंगाल पुलिस की जांच में यह सामने आया कि चंद्रनाथ रथ पर हमला करने से पहले हमलावरों की गाड़ी बाली टोल प्लाजा से गुजरी थी। यहां गाड़ी में सवार एक शख्स ने टोल का भुगतान यूपीआई के जरिए किया था। इसी डिजिटल फुटप्रिंट को खंगालते हुए पुलिस मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य तक पहुंची, जिन्हें बक्सर के पीसी कॉलेज के पास से गिरफ्तार किया गया। इनके अलावा, बलिया निवासी राज सिंह को अयोध्या से दबोचा गया। तीनों को उत्तरी 24 परगना की अदालत में पेश कर 13 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। इन पर हत्या में इस्तेमाल वाहन को झारखंड से बंगाल तक पहुंचाने का आरोप है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में कम से कम आठ लोग शामिल थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
विशाल श्रीवास्तव का कनेक्शन और हत्या का तरीका
पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले बक्सर के विशाल श्रीवास्तव को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। विशाल पर चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद दो युवकों को संरक्षण व आश्रय देने का शक है। विशाल पर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। पश्चिम बंगाल पुलिस का मानना है कि बक्सर से गिरफ्तार किए गए दोनों युवकों की हत्या में सीधी भूमिका नहीं थी, बल्कि वे उस गाड़ी को बंगाल लेकर गए थे जिसका इस्तेमाल बाद में हत्या के दौरान किया गया। इसी एसयूवी से चंद्रनाथ का रास्ता रोका गया और फिर उन पर गोलियों की बरसात कर दी गई। पुलिस को हालांकि इन युवकों के मौके पर होने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। यह घटना 6 मई की रात पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम (उत्तर 24 परगना) इलाके में हुई थी। सूत्रों के अनुसार, इन युवकों को पहले धनबाद बुलाया गया था, फिर वहां से चार पहिया गाड़ी लेकर ये बंगाल गए और टोल प्लाजा पर ऑनलाइन भुगतान किया। तकनीकी अनुसंधान में बंगाल पुलिस को Chandranath Rath murder case में यह बहुत बड़ा सुराग मिला। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि झारखंड से बंगाल पहुंचने पर उनके सहयोगियों ने उनसे गाड़ी ले ली और दोनों को ट्रेन से वापस झारखंड भेज दिया।
विदेशी हथियार और गहरी साजिश
हत्या के बाद मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य छुपकर रह रहे थे, और विशाल श्रीवास्तव ने उन्हें छिपने में मदद की थी। पश्चिम बंगाल पुलिस ने पहले विशाल को पकड़ा था, लेकिन मुफस्सिल थाने में दर्ज एक अन्य मामले में कोर्ट ने उसे जमानत दे दी। अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों ने रथ पर हमला करने के बाद अपनी सिल्वर कार छोड़ दी और एक लाल कार व बाइक से फरार हो गए। इस हत्याकांड में इस्तेमाल किया गया हथियार ऑस्ट्रिया में बनी ‘ग्लॉक 47 एक्स’ पिस्टल थी, जो एक अत्याधुनिक हथियार है और भारत में आपराधिक मामलों में कम ही देखा जाता है। भारत में ग्लॉक पिस्टल आसानी से उपलब्ध नहीं होती है, ऐसे में जांच एजेंसियां इस एंगल से भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं इस अपराध का कोई अंतरराष्ट्रीय लिंक तो नहीं है। चंद्रनाथ रथ की बेरहमी से हत्या के लिए अपराधियों ने लंबी और गहरी साजिश रची थी। हत्याकांड को अंजाम देने के लिए पेशेवर गिरोह की तरह तैयारी की गई थी। हत्या में शामिल आरोपियों ने गाड़ियों की नंबर प्लेट बदली, चेसिस नंबर घिसे और विदेशी हथियारों का इंतजाम किया। लेकिन अंततः उनकी यह साजिश और प्रयास उन पर ही भारी पड़ गए और अब वे पुलिस की गिरफ्त में हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पुलिस की लगातार कार्रवाई के कारण इस बक्सर से गिरफ्तारियां महत्वपूर्ण साबित हुई हैं।
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