Bihar Farakka Treaty: फरक्का जल संधि के भविष्य को लेकर बिहार की बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने राज्य के हितों की रक्षा का महत्वपूर्ण आश्वासन दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत-बांग्लादेश के बीच होने वाली नई संधि में बिहार की पेयजल और औद्योगिक आवश्यकताओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा। यह भरोसा ऐसे समय में आया है, जब भारत और बांग्लादेश के बीच 30 वर्षीय फरक्का जल संधि की अवधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाली है।
जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने विदेश मंत्री के इस जवाब को बिहार के लिए उम्मीद बढ़ाने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि बिहार लंबे समय से गंगा के पानी में अपनी न्यायसंगत हिस्सेदारी और भविष्य की जरूरतों को लेकर आवाज उठाता रहा है। झा का कहना है कि राज्य किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि वैज्ञानिक आकलन के आधार पर अपने वाजिब जल अधिकार की बात कर रहा है।
बिहार की चिंताओं पर केंद्र ने क्या कहा?
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 28 अगस्त 2026 को संजय कुमार झा को एक पत्र भेजकर उनकी चिंताओं का जवाब दिया। झा ने 6 अगस्त को राज्यसभा में विशेष उल्लेख के माध्यम से फरक्का जल संधि के नवीनीकरण को लेकर बिहार के हितों की रक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। विदेश मंत्री ने अपने पत्र में कहा कि केंद्र सरकार गंगा जल संधि से जुड़ी बिहार की चिंताओं को अच्छी तरह समझती है। उन्होंने यह भी बताया कि संधि के क्रियान्वयन और उसके भविष्य को लेकर पहले से ही व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जा चुका है।
इस प्रक्रिया में विभिन्न मंत्रालयों और संबंधित पक्षों को शामिल किया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से वर्ष 2023 और 2024 में कई अंतर-मंत्रालयी बैठकें आयोजित की गई थीं। इन बैठकों में बिहार सरकार के अधिकृत प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया था, जिसमें 22 अगस्त 2023, 30 अक्टूबर 2023, 15 मार्च 2024 और 31 मई 2024 को हुई बैठकें शामिल हैं।
पेयजल और औद्योगिक जरूरतों पर विशेष जोर
इन बैठकों में केवल संधि के तकनीकी पहलुओं पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि बिहार की भविष्य की जल जरूरतों को भी एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में रखा गया। खास तौर पर राज्य की बढ़ती आबादी के लिए पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी की उपलब्धता पर गहन विचार किया गया। केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि अंतिम फैसला करते समय इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
संजय कुमार झा ने कहा, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पहले कार्यकाल से ही फरक्का बराज से गंगा पर पड़ने वाले प्रभाव और बिहार की जल हिस्सेदारी का मुद्दा उठाते रहे हैं। बिहार के लिए यह केवल वर्तमान की जरूरत का सवाल नहीं है, यह आने वाले दशकों की जल सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है।”
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2023 में हुई बैठकों के दौरान संजय कुमार झा स्वयं बिहार सरकार में जल संसाधन मंत्री थे। उनके कार्यकाल में राज्य के जल संसाधन विभाग ने फरक्का बराज से जुड़े मुद्दों और बिहार पर पड़ने वाले प्रभावों को केंद्र के सामने मजबूती से रखा था।
आगामी 30 वर्षों की जल सुरक्षा का सवाल
बिहार लगातार यह सवाल उठाता रहा है कि गंगा और उसकी सहायक नदियों के जल का बंटवारा राज्य की जरूरतों और वैज्ञानिक आकलन के आधार पर होना चाहिए। राज्य की करीब 13 करोड़ आबादी के लिए पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखकर भविष्य की योजना बनाना अनिवार्य है। पानी की उपलब्धता राज्य के विकास और आर्थिक गतिविधियों से भी सीधे जुड़ी हुई है।
संजय कुमार झा ने विदेश मंत्री के सकारात्मक जवाब के लिए आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार संधि पर जो भी फैसला करेगी, उसमें बिहार के हितों को न्यायोचित तरीके से शामिल किया जाएगा। जदयू नेता ने कहा कि पार्टी गंगा और बिहार से होकर बहने वाली उसकी सहायक नदियों के पानी में राज्य की वैज्ञानिक और तय हिस्सेदारी सुनिश्चित कराने की मुहिम जारी रखेगी। उनका कहना है कि बिहार के जल अधिकारों का सवाल भविष्य की पीढ़ियों से भी जुड़ा हुआ है।
फरक्का जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच दिसंबर 1996 में हुई थी। इसकी निर्धारित अवधि 30 वर्ष है और यह अवधि 12 दिसंबर 2026 को पूरी हो रही है। ऐसे में संधि के भविष्य पर होने वाला फैसला बिहार के जल संसाधनों और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








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