Bihar Teacher Transfer: बिहार के लाखों शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने गुरुवार को ‘बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली, 2026’ की अधिसूचना जारी कर दी है। इस नई नियमावली के तहत शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और पोर्टल आधारित बनाया गया है। अब शिक्षकों के स्वेच्छिक स्थानांतरण के लिए सात प्राथमिकता क्रम तय किए गए हैं, जिससे योग्य शिक्षकों को वरीयता के आधार पर मनचाही पोस्टिंग मिल सकेगी।
हर 5 साल पर होगा तबादला, मार्च में आवेदन, जून तक प्रक्रिया
नई व्यवस्था के अनुसार, प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक के नियमित शिक्षकों, प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों का स्थानांतरण अब हर पांच साल की सेवा पूरी होने के बाद किया जा सकेगा। शिक्षकों के लिए मार्च महीने में आवेदन करने की सुविधा होगी और जून तक उनके तबादले की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। हालांकि, यह स्थानांतरण विद्यालय में रिक्तियों, शिक्षक-छात्र अनुपात, विषयवार आवश्यकता और छात्रों के शैक्षणिक हित को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा। इच्छित विद्यालय नहीं मिलने को अपील का आधार नहीं माना जाएगा।






यदि किसी विद्यालय के लिए एक से अधिक शिक्षक आवेदन करते हैं, तो चयन अंक आधारित वरीयता प्रणाली से होगा। इसमें सेवा अवधि, कठिन क्षेत्र में पदस्थापन और विशेष परिस्थितियों के लिए अंक निर्धारित किए गए हैं। गंभीर बीमारी (जैसे कैंसर, किडनी प्रत्यारोपण), दिव्यांगता, पति-पत्नी पदस्थापन और राष्ट्रीय व राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को अतिरिक्त वरीयता अंक मिलेंगे। चिकित्सा व दिव्यांगता के मामलों में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र जमा करना अनिवार्य होगा।
इन 7 श्रेणियों को मिलेगी पहली प्राथमिकता
बिहार में शिक्षक स्थानांतरण में वरीयता का क्रम इस प्रकार रहेगा:
- सबसे पहले असाध्य रोग और गंभीर चिकित्सा स्थिति वाले शिक्षकों का तबादला होगा।
- दूसरे नंबर पर दिव्यांग शिक्षकों को ट्रांसफर में प्राथमिकता दी जाएगी।
- फिर पति-पत्नी के आधार पर पोस्टिंग पर विचार किया जाएगा।
- इसके बाद विधवा, विधिक रूप से पृथक महिला शिक्षक और एकल अभिभावक टीचर का तबादला होगा।
- पांचवें क्रम पर पारस्परिक स्थानांतरण (म्युचुअल ट्रांसफर) को रखा गया है।
- छठे नंबर पर समायोजन और समानुपातीकरण के आधार पर स्थानांतरण होगा।
- अंत में सामान्य स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
महिला और पुरुष शिक्षकों के लिए अलग नियम
नियमावली में महिला और पुरुष शिक्षकों के लिए पदस्थापन के अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। महिला शिक्षकों को उनके अनुरोध पर गृह प्रखंड में पदस्थापन पर विचार किया जाएगा, जबकि पुरुष शिक्षकों को गृह जिले में पोस्टिंग पर विचार होगा। किसी भी शिक्षक को गृह पंचायत या गृह वार्ड में पदस्थापित नहीं किया जाएगा। हालांकि, गंभीर बीमारी या उच्च दिव्यांगता के मामलों में इन प्रतिबंधों में छूट मिल सकती है। महिला शिक्षकों को अपने बगल वाली पंचायत और पुरुष शिक्षकों को अपने बगल वाले प्रखंड में पोस्टिंग मिल सकती है।
प्रशासनिक आधार पर भी ट्रांसफर संभव
केवल स्वेच्छिक ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक आधार पर भी शिक्षकों का स्थानांतरण किया जा सकेगा। इसमें विद्यालय में शिक्षक-छात्र अनुपात बिगड़ने, वित्तीय अनियमितता, अनुशासनहीनता, लगातार अनुपस्थित रहने, महिला शिक्षकों या छात्राओं से दुर्व्यवहार की शिकायत, अथवा विद्यालय संचालन प्रभावित होने जैसी परिस्थितियां शामिल हैं। ऐसे मामलों में संबंधित शिक्षक को सामान्यतः सात कार्य दिवस का समय दिया जाएगा, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें।
तीन स्तर पर बनेंगी स्थानांतरण समितियां
स्थानांतरण की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए जिला, प्रमंडलीय और राज्य स्तर पर स्थापना समितियां गठित की जाएंगी। जिला स्तर पर छह सदस्यीय कमेटी के अध्यक्ष जिलाधिकारी होंगे, और जिला शिक्षा पदाधिकारी इसके सदस्य सचिव होंगे। अंतर-जिला और विशेष मामलों पर प्रमंडलीय कमेटी निर्णय लेगी, जिसके अध्यक्ष प्रमंडलीय आयुक्त और सदस्य सचिव क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक होंगे।
राज्य स्तर पर उच्च माध्यमिक विद्यालयों के संदर्भ में माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी होगी, जिसके सदस्य सचिव माध्यमिक शिक्षा के उपनिदेशक होंगे। इसी प्रकार, प्रारंभिक विद्यालयों के संदर्भ में प्राथमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता वाली कमेटी के सदस्य सचिव प्राथमिक शिक्षा के उपनिदेशक होंगे। यह नई नियमावली बिहार में शिक्षक स्थानांतरण को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य रखती है।








