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नाबार्ड के 45 साल पूरे! स्थापना दिवस पर CGM गौतम कुमार सिंह ने क्या कहा- कैसे बिहार के ग्रामीण इलाकों में बदली तस्वीर?

Bihar NABARD: बिहार के ग्रामीण इलाकों में समृद्धि और किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के 45 साल पूरे हुए। इस अवसर पर बैंक ने अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।

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Bihar NABARD: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने हाल ही में अपना 45वां स्थापना दिवस मनाया। यह अवसर बिहार सहित पूरे देश में ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में नाबार्ड के चार दशकों से अधिक के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करता है। इस खास मौके पर, बैंक ने अपनी अब तक की यात्रा और भविष्य की रणनीति पर चिंतन किया, जो ग्रामीण भारत की समृद्धि के लिए उसकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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नाबार्ड 12 जुलाई को अपना 45वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस अवसर पर मौर्या लोक कॉम्प्लेक्स स्थित बिहार क्षेत्रीय कार्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें बिहार राज्य सहकारी बैंक, नालंदा जिला सहकारी बैंक, सीवान जिला सहकारी बैंक, गोपालगंज जिला सहकारी बैंक, पाटलीपुत्र जिला सहकारी बैंक एवं वैशाली जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष सहभागी रहे।

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नाबार्ड: 45 साल का ग्रामीण विकास का सफर

नाबार्ड की स्थापना 1982 में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि, लघु उद्योगों, कुटीर उद्योगों और ग्रामीण शिल्प को बढ़ावा देने के लिए ऋण और अन्य सुविधाएं प्रदान करना था। पिछले 45 वर्षों में, नाबार्ड ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। इसने किसानों को कृषि उत्पादकता बढ़ाने, ग्रामीण आधारभूत संरचना विकसित करने और गैर-कृषि गतिविधियों के माध्यम से आजीविका के अवसर पैदा करने में मदद की है। बैंक ने कृषि ऋण, सिंचाई परियोजनाओं, ग्रामीण सड़कों और गोदामों के निर्माण जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वित्तपोषण प्रदान किया है।

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नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा

अपने उद्घाटन संबोधन में नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने 1982 में नाबार्ड की स्थापना से अब तक कृषि एवं ग्रामीण विकास में नाबार्ड के प्रयासों को साझा किया। अपने संबोधन में उन्होनें किसान क्रेडिट कार्ड तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ऋण वितरण की परिकल्पना, जलछाजन परियोजनओं से मृदा एवं जल प्रबंधन, स्थानीय उत्पादों को जी आई टैग हासिल करने में सहयोग तथा आर आई डी एफ के माध्यम से ग्रामीण आधारभूत संरचना के सृजन में सहयोग को नाबार्ड की अबतक की प्रमुख उपलब्धियों में से कुछ के रूप में रेखांकित किया। उन्होनें यह भी बताया कि भारत सरकार की पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना जिसका कार्यान्वयन नाबार्ड द्वारा किया जा रहा है, से आने वाले दिनों में कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल सकता है। उन्होनें जलवायु परिवर्तन तथा आय की बढ़ती विषमता के मद्देनजर नाबार्ड कर्मियों को नाबार्ड की अग्रेतर भूमिका के लिए तैयार रहने का आह्वान भी किया।

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बिहार के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली संजीवनी

बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए नाबार्ड का योगदान अमूल्य रहा है। राज्य के लाखों किसानों को नाबार्ड के माध्यम से रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध हुआ है, जिससे वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपना सके और अपनी उपज बढ़ा सके। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को सशक्त बनाने और सूक्ष्म-उद्यमों को बढ़ावा देने में भी नाबार्ड की भूमिका सराहनीय रही है। बिहार में ग्रामीण सड़कों, पुलों और जल निकासी परियोजनाओं जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को नाबार्ड के समर्थन से पूरा किया गया है, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार आया है और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।

भविष्य की राह: ग्रामीण समृद्धि का संकल्प

अपने 45वें स्थापना दिवस पर, नाबार्ड ने ग्रामीण भारत के सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बैंक जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने, डिजिटल कृषि को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों का समर्थन करने जैसी नई चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। नाबार्ड का लक्ष्य है कि वह आने वाले वर्षों में भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाए, जिससे बिहार सहित देश के हर ग्रामीण परिवार को समृद्धि और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का अवसर मिल सके।

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अथितियों ने सभा को संबोधित करते हुए नाबार्ड को स्थापना दिवस के अवसर पर बधाई दी। सभी ने कृषि एवं ग्रामीण विकास में नाबार्ड के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि आज राष्ट्र खाद्यान, सब्जी, फल आदि के उत्पादन में अग्रणी है और ऐसा नीति निर्धारकों, किसानों, कार्यान्वयन संस्थानों, सहकारी संस्थानों आदि के समेकित प्रयास से संभव हो पाया है और इसमें नाबार्ड की भी बड़ी भूमिका रही है। उन्होनें कृषि एवं ग्रामीण विकास को और गति प्रदान करने के लिए नाबार्ड की भूमिका एवं आपसी सहयोग को बढ़ाने पर बल दिया ।

कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड के प्रयासों से हाल में ही जी आई टैग हासिल करने वाले गयाजी के पत्थरकट्टी, नालंदा के बावनबूटी एवं भोजपुर के पीढ़िया पेंटिंग की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम में नाबार्ड की महाप्रबंधक अनामिका, बिहार राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक एवं बिहार ग्रामीण बैंक के महाप्रबंधक की भी उपस्थिति रही।

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