
पशुपति पारस का स्वास्थ्य: बिहार की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने तब और सुर्खियां बटोरीं, जब उनके भतीजे और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे। लंबे समय से चल रही राजनीतिक दूरियों के बीच यह मुलाकात कई मायने में अहम मानी जा रही है।
पशुपति पारस का स्वास्थ्य बिगड़ा: अस्पताल में भर्ती
मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख पशुपति कुमार पारस को सांस लेने में तकलीफ के बाद पटना के कंकड़बाग स्थित साईं अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दौरान पशुपति पारस का स्वास्थ्य स्थिर बताया जा रहा है, हालांकि वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
खबर सुनते ही उनके कई समर्थक अस्पताल पहुंचे और उनका हालचाल जाना। इस बीच मंगलवार को जब चिराग पासवान पटना पहुंचे, तो उन्हें अपने चाचा की बीमारी का पता चला। राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए चिराग सीधे अस्पताल पहुंचे और अपने चाचा का हालचाल पूछा। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पारस उनके लिए पिता समान हैं और वे एक बेटे के नाते उनसे मिलने आए हैं, न कि राजनेता के तौर पर।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
रामविलास पासवान के निधन के बाद हुई थी पार्टी में टूट
लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी विरासत को लेकर बेटे चिराग पासवान और भाई पशुपति पारस के बीच गहरा विवाद हो गया था। यह विवाद इतना बढ़ा कि पार्टी दो धड़ों में बंट गई। पशुपति पारस ने उस समय पार्टी के पांच सांसदों का समर्थन हासिल कर लिया था और केंद्र में मंत्री भी बन गए थे, जबकि चिराग पासवान अलग-थलग पड़ गए थे। इस टूट के बाद चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोजपा (रामविलास) और पशुपति पारस के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) का उदय हुआ। हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 से पहले चिराग की एनडीए में वापसी हुई और पशुपति पारस को मंत्री पद छोड़ना पड़ा। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले रालोजपा ने एनडीए से नाता तोड़कर अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
क्या पिघल रही चाचा-भतीजा के बीच की बर्फ?
लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक गतिरोध के बावजूद, पिछले कुछ समय से चाचा और भतीजे के बीच जमी बर्फ पिघलती दिख रही है। जब चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) ने बिहार चुनाव में 19 विधायक सीटें जीतीं, तब पशुपति पारस ने उन्हें बधाई दी थी। इसके बाद खगड़िया में एक पारिवारिक कार्यक्रम में चिराग ने अपने चाचा के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया था। हाल ही में, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच, पशुपति पारस ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अगर उनके भतीजे चिराग बिहार के मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उन्हें खुशी होगी। उन्होंने पार्टी और परिवार को फिर से एक करने की बात भी कही थी। यह चाचा-भतीजा मुलाकात कई संकेत दे रही है और बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रही है।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस चाचा-भतीजा मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या यह सिर्फ एक मानवीय संवेदना थी या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छुपा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुलाकात दोनों के रिश्तों को किस दिशा में ले जाती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें





