
श्वसन आपात सेवा: पटना में वायु प्रदूषण के बढ़ते कहर के बीच सांस के मरीजों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। राजधानी के प्रमुख अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) ने अब गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए 24 घंटे की आपातकालीन सेवा शुरू करने का फैसला किया है। यह पहल उन मरीजों के लिए संजीवनी साबित होगी, जिन्हें तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है।
पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में अब श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की बढ़ती संख्या और गंभीरता को देखते हुए 24 घंटे संचालित होने वाली श्वसन आपात सेवा शुरू करने का निर्णय लिया है। इस पहल को राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य संकट के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने जानकारी दी कि इस नई व्यवस्था के तहत पुराने आपातकालीन वार्ड में 20 बेड विशेष रूप से श्वसन रोगियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। यह नई इकाई अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी, जहां मरीजों को तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे पहले ऐसे मरीजों को अलग-अलग विभागों में जाना पड़ता था, जिससे इलाज में देरी होती थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
श्वसन आपात सेवा के तहत मिलेंगी ये अत्याधुनिक सुविधाएं
नई श्वसन आपात इकाई में निमोनिया, दमा, क्षय रोग (टीबी), ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित मरीजों के लिए समुचित व्यवस्था की गई है। यहां ऑक्सीजन सपोर्ट, नेबुलाइजेशन, फेफड़ों की कार्यक्षमता जांच और आपातकालीन प्रबंधन जैसी सभी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इससे मरीजों को समय पर और समुचित इलाज मिल सकेगा।
- निमोनिया, दमा, टीबी, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के संक्रमण का इलाज
- ऑक्सीजन सपोर्ट की सुविधा
- नेबुलाइजेशन की व्यवस्था
- फेफड़ों की कार्यक्षमता जांच
- आपातकालीन प्रबंधन
विशेष जांचों की भी होगी सुविधा
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, ब्रोंकोस्कोपी जांच के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। यह जांच सीयूबी भवन के तीसरे तल पर की जाएगी, जबकि अन्य आवश्यक जांच आपातकालीन विभाग में ही उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा खर्राटे और नींद के दौरान सांस रुकने जैसी समस्याओं के निदान के लिए स्लीप स्टडी की सुविधा भी शुरू की गई है, जो अब तक सीमित अस्पतालों में ही उपलब्ध थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
क्यों पड़ी इस सेवा की जरूरत?
पटना में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए इस श्वसन आपात सेवा की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। शहर अक्सर देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल रहता है, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स के बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या में करीब 30 प्रतिशत तक वृद्धि देखी जाती है।
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