
Defamation Case: राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व विधायक प्रेम शंकर यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी पर सोशल मीडिया के जरिए 40% कमीशन के गंभीर आरोप लगाना अब उन्हें महंगा पड़ गया है। गोपालगंज कोर्ट ने मानहानि के एक मामले में उन्हें समन जारी कर दिया है, जिसमें उन्हें 5 जून को कोर्ट में पेश होना है।
गोपालगंज कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व विधायक प्रेम शंकर यादव के खिलाफ एक मानहानि मामले में समन जारी कर दिया है। यह मामला साल 2022 में सोशल मीडिया पर दिए गए एक बयान से जुड़ा हुआ है। शुक्रवार को गोपालगंज के एसीजेएम-1 गोपाल प्रसाद की अदालत ने मामले में संज्ञान लेते हुए प्रेम शंकर यादव को 5 जून को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि तय तारीख पर उपस्थित नहीं होने या जमानत नहीं लेने की स्थिति में मामले का ट्रायल शुरू किया जा सकता है और दोष साबित होने पर सजा भी हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
क्या है पूरा Defamation Case?
जानकारी के अनुसार, यह विवाद 17 अक्टूबर 2022 को तब शुरू हुआ जब बैकुंठपुर के तत्कालीन विधायक प्रेम शंकर यादव ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया। इस बयान में उन्होंने बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी पर नारायणी रिवर फ्रंट निर्माण कार्य में 40 प्रतिशत कमीशन लेने का सीधा आरोप लगाया था। आरोप सिर्फ कमीशन तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि बयान में जातीय तनाव बढ़ाने वाली आपत्तिजनक टिप्पणियां भी शामिल होने का आरोप लगाया गया। इसी के मद्देनजर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की ओर से गोपालगंज कोर्ट में मानहानि का केस दायर किया गया।
कोर्ट ने जारी किया समन और दिए निर्देश
इस गंभीर मानहानि मामले की सुनवाई के बाद, अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया पूर्व विधायक के खिलाफ मानहानि का मामला बनता है। इसके बाद कोर्ट ने प्रेम शंकर यादव के खिलाफ कोर्ट समन जारी कर दिया। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के वकील राजेश पाठक ने मीडिया को बताया कि अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को कोर्ट में सदेह उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अब अगली सुनवाई में पूर्व विधायक प्रेम शंकर यादव की तरफ से अपना जवाब दाखिल किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
यह घटना बिहार की राजनीति में सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के गंभीर परिणामों को दर्शाती है, जहाँ नेताओं को अपने बयानों के लिए कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।







