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UGC NET Coaching: बिहार में EWS छात्रों के लिए बड़ा झटका, दाखिले पर लगी रोक!

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UGC NET Coaching: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए बुरी खबर है। उनके भविष्य को संवारने वाले करियर गाइडेंस सेंटर में नए सत्र के दाखिले पर फिलहाल रोक लगा दी गई है, जिससे हजारों छात्रों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। अप्रैल में शुरू होने वाली नामांकन प्रक्रिया से ठीक पहले आए इस फैसले ने छात्रों में असमंजस और गहरी चिंता पैदा कर दी है।

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क्यों महत्वपूर्ण था यह यूजीसी नेट कोचिंग केंद्र?

यह करियर गाइडेंस सेंटर वर्ष 2022 में उन छात्रों के लिए शुरू किया गया था, जो महंगे कोचिंग संस्थानों का खर्च नहीं उठा सकते। इसका उद्देश्य उन्हें यूजीसी नेट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी का अवसर प्रदान करना था। पटना विश्वविद्यालय परिसर में संचालित इस केंद्र में नियमित कक्षाएं चलती थीं और छह महीने का एक व्यवस्थित कोर्स चलाया जाता था, जो छात्रों को सफल होने में मदद करता था।

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सरकारी निर्देश और विश्वविद्यालयों पर असर

बिहार राज्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के निदेशक ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को एक कड़ा पत्र भेजा है। इस पत्र में साफ कहा गया है कि बिना विभागीय अनुमति के कोई भी नया दाखिला न लिया जाए। साथ ही, चेतावनी भी दी गई है कि निर्देशों का उल्लंघन होने पर संबंधित विश्वविद्यालय पूरी तरह जिम्मेदार होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस फैसले का असर पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, तिलकामांझी विश्वविद्यालय भागलपुर, मधेपुरा विश्वविद्यालय और मुजफ्फरपुर विश्वविद्यालय सहित राज्य के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों पर पड़ा है। इन सभी संस्थानों में यह सेंटर छात्रों को यूजीसी नेट कोचिंग प्रदान कर रहा था।

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मौजूदा छात्रों का क्या होगा और छात्रों का भविष्य?

पटना विश्वविद्यालय के करियर गाइडेंस सेंटर में इस समय करीब 240 छात्र नामांकित हैं। इनमें से 120 छात्रों का कोर्स जून में पूरा हो जाएगा, जबकि बाकी छात्र भी अपने तय शेड्यूल के अनुसार पढ़ाई कर रहे हैं। अन्य विश्वविद्यालयों में भी स्थिति ऐसी ही है। इस सेंटर ने अब तक 42 छात्रों को यूजीसी नेट परीक्षा में सफल होने में मदद की है, जो इसकी उपयोगिता का प्रमाण है। सेंटर के निदेशक प्रो. कामेश्वर पंडित ने बताया कि यह पहल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए थी। ऐसे में दाखिले पर रोक लगने से सबसे ज्यादा प्रभावित वही छात्र होंगे जो इस सुविधा पर निर्भर थे। यह रोक सीधे तौर पर हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित कर सकती है। अब सभी की नजर विभाग के अगले फैसले पर टिकी है कि क्या दाखिले फिर से शुरू होंगे या नहीं, और इन छात्रों का भविष्य क्या होगा।

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