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मार्च, 15, 2026
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Wildlife Smuggling Bihar: मधुबनी से मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मोतिहारी तक फैला ‘मौत का सौदा’, करोड़ों की तेंदुएं- हिरण की खाल तस्करी का पढ़िए…पलामू टाइगर रिजर्व पार्क का सिंडिकेट कनेक्शन

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Wildlife Smuggling Bihar: जब जंगल के शिकारी, शहर के बाज़ार में सौदा करने निकलें, तो समझो प्रकृति का संतुलन खतरे में है। बिहार में वन्यजीवों की खालों की तस्करी का एक बड़ा और संगठित नेटवर्क बेनकाब हुआ है। मधुबनी के झंझारपुर में तेंदुए और हिरण (चीतल) की खाल जब्त होने के बाद हुई जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जो मुजफ्फरपुर से मोतिहारी तक इस ‘मौत के सौदे’ के तार जोड़ रहे हैं।

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Wildlife Smuggling Bihar: करोड़ों के सौदे में बड़े नाम शामिल

वन विभाग की जांच में सामने आया है कि झंझारपुर में जब्त की गई खालों का सौदा 2.2 करोड़ रुपये में तय हुआ था, जिसे मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर निवासी तस्कर सुधाकर कुमार तक पहुंचाया जाना था। वहीं, 1.5 करोड़ रुपये मोतिहारी में एक बड़े आभूषण शो-रूम के मैनेजर प्रणव कुमार को दिए जाने थे। झंझारपुर में खालों के साथ गिरफ्तार हुए तस्करों से गहन पूछताछ में यह सनसनीखेज जानकारी सामने आई है, जिसकी सत्यता की पुष्टि में वन विभाग की टीम लगी हुई है।

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इस तस्करी नेटवर्क में मुजफ्फरपुर के राहुल नगर निवासी धीरज कुमार की गिरफ्तारी के साथ ही, मुजफ्फरपुर के सुधाकर और तपन के संबंध बाघ के नाखून, तेंदुए और हिरण की खालों के अंतर्राज्यीय नेटवर्क से जुड़ते दिख रहे हैं। वन अधिकारियों की प्रारंभिक जांच बताती है कि झंझारपुर में मिली खालें संभवतः पलामू टाइगर रिजर्व पार्क के संरक्षित वन्यजीवों से संबंधित हो सकती हैं। इसमें कई बड़े और संगठित तस्कर गिरोह की संलिप्तता स्पष्ट रूप से सामने आ रही है। जांच अधिकारियों ने करोड़ों की इस डील की संभावनाओं और नए खुलासों से गहरी चिंता व्यक्त की है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई केंद्रीय एजेंसियों और कोलकाता की विशेष टीम के संयुक्त समन्वय से की गई है। झंझारपुर के रेंजर अर्जुन कुमार गुप्ता ने बताया कि पलामू क्षेत्र के शूटरों और तस्करों से मिली गोपनीय सूचनाओं के आधार पर लंबी निगरानी के बाद झंझारपुर में जाल बिछाया गया था, जिसकी मॉनिटरिंग केंद्रीय टीम गुप्त रूप से कर रही थी।

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रडार पर मुजफ्फरपुर समेत पांच बड़े तस्कर

गिरफ्तार तस्करों में पूर्वी चंपारण के फेनहरा थाना के कुम्हरार निवासी चंदन सिंह, मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा राहुल नगर के धीरज कुमार, मधुबनी के लखनौर थाना के रहिका निवासी अजय कुमार झा और दक्षिण बेहट निवासी पंकज कुमार झा शामिल हैं। इनके कबूलनामे के अनुसार, माड़ीपुर के सुधाकर व तपन के अलावा धीरज श्रीवास्तव, राकेश उर्फ गुड्डू भैया और संदीप बॉस इस सिंडिकेट के पर्दे के पीछे से डील कराने वाले मुख्य सूत्रधार हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

वन अधिकारियों की टीम ने इन सभी बड़े नामों को जांच के रडार पर रखा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आगे चलकर कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। गिरफ्तार किए गए चारों तस्कर इस सिंडिकेट में केवल प्यादे के तौर पर काम कर रहे थे, जिन्हें इस काम के लिए 30 हजार से लेकर पांच लाख रुपये तक का कमीशन मिलने वाला था। यह घटना दर्शाती है कि बिहार में Illegal wildlife trade का जाल कितना गहरा है।

मोबाइल पर हुई खालों की ‘तस्वीरी डील’

आरोपियों के कबूलनामे से पता चला है कि इस पूरे गोरखधंधे की शुरुआत मोबाइल के माध्यम से खालों की तस्वीरों के आदान-प्रदान से हुई थी। इसके बाद कीमत तय की गई और फिर सौदे को अंतिम रूप देने के लिए तस्कर झंझारपुर में एकत्रित हुए। राहुल नगर के गिरफ्तार तस्कर धीरज कुमार ने कबूल किया है कि उसने अजय झा से खालों के संबंध में मोबाइल पर बात की थी। अजय ने उसे हिरण और तेंदुए की खालों की तस्वीरें फोन पर भेजीं, जिसे धीरज ने मुजफ्फरपुर के तपन को भेजकर सौदा तय कराया।

पूर्वी चंपारण के चंदन सिंह ने अपने कबूलनामे में धीरज श्रीवास्तव द्वारा उसे बाघ के नाखून के बारे में बताने और उसकी तस्वीर भेजने की बात कही है। इस तस्वीर को उसने ‘कॉप्स पब्लिक सर्वेंट’ नामक व्यक्ति को मोबाइल पर भेजा था। हालांकि, बाघ के नाखून की डील का क्या हुआ, इसका पूरा खुलासा कबूलनामे में नहीं किया गया है। इससे पहले दरभंगा में वन विभाग की संयुक्त टीम ने वन्यजीव खाल तस्करी के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से दो हिरण और एक तेंदुए की खाल बरामद की गई है। गिरफ्तार तस्करों की पहचान मधुबनी जिले के लखनौर थाना क्षेत्र अंतर्गत रहिका निवासी स्व. अरुण कुमार झा के पुत्र अजय कुमार झा उर्फ बबलू, झंझारपुर के दक्षिण बेहट गांव निवासी स्व. राम नारायण झा के पुत्र पंकज कुमार झा, मुजफ्फरपुर जिले के राहुल नगर गांव निवासी स्व. यदुनंदन प्रसाद के पुत्र धीरज कुमार तथा पूर्वी चंपारण जिले के फेनारा थाना क्षेत्र के कुम्हरार गांव निवासी बृजेंद्र कुमार सिंह के पुत्र चंदन कुमार सिंह के रूप में हुई।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह खुलासा बिहार में Wildlife Smuggling Bihar के बढ़ते खतरों की ओर इशारा करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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