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इंडियन स्टॉक मार्केट: भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारतीय बाजार की दिशा और दशा

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Indian Stock Market: पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में बेकाबू उतार-चढ़ाव भारतीय शेयर बाजार के लिए एक तूफानी सप्ताह का संकेत दे रहे हैं। सिर्फ बाहरी कारक ही नहीं, बल्कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर के फैसले और घरेलू मुद्रास्फीति के आंकड़े भी बाजार की चाल को नाटकीय रूप से प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह सप्ताह निवेशकों के लिए किसी रोलरकोस्टर से कम नहीं होगा, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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इंडियन स्टॉक मार्केट: भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारतीय बाजार की दिशा और दशा

इंडियन स्टॉक मार्केट पर मंडराते वैश्विक संकट के बादल

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के शोध उपाध्यक्ष अजित मिश्रा ने बताया कि आगामी सप्ताह घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और आंकड़ों से भरा रहेगा। उनकी मानें तो भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर विशेष नजर बनाए रखनी होगी, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों पर उनका सीधा प्रभाव बाजार की समग्र दिशा को तय करने वाला प्रमुख कारक बन सकता है। घरेलू मोर्चे पर, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति, व्यापार संतुलन के आंकड़े और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे व्यापक आर्थिक संकेतकों पर बाजार की तीखी निगाहें बनी रहेंगी, जो निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करेंगे।

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लाइवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक और शोध विश्लेषक हरिप्रसाद के. के अनुसार, पिछले सप्ताह भारतीय बाजार भारी दबाव में रहा। वैश्विक जोखिम धारणा में गिरावट, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली ने बाजार को निचले स्तरों पर धकेल दिया। आंकड़ों पर गौर करें तो, पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स में 4,354.98 अंक या 5.51 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि एनएसई निफ्टी भी 1,299.35 अंक या 5.31 प्रतिशत टूट गया।

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निवेशकों के लिए आगे की राह

विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि 27 फरवरी से अब तक Sensex 6,723.27 अंक या 8.27 प्रतिशत नीचे आ चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी गतिरोध वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति को और बाधित कर सकता है, जिससे एशिया में मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है। एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर का कहना है कि आने वाले सप्ताह में बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण पोत परिवहन में होने वाली किसी भी देरी का असर भारत जैसे उभरते बाजारों में वैश्विक पूंजी आवंटन पर भी पड़ सकता है।

विदेशी निवेशकों ने मार्च के पहले पखवाड़े में भारतीय शेयरों से लगभग 52,704 करोड़ रुपये की बड़ी निकासी की है। इसके पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भारतीय वृद्धि दर पर संभावित प्रभाव प्रमुख कारण रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने बताया कि इस सप्ताह निवेशकों की नजर यूरो क्षेत्र के सीपीआई आंकड़ों, बैंक ऑफ इंग्लैंड (बीओई) और यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) के नीतिगत फैसलों के साथ-साथ अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों पर भी रहेगी, जो वैश्विक बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

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