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चैत्र अमावस्या 2026: पितरों को शांति दिलाने का महापर्व

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Chaitra Amavasya: हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है, खासकर जब यह चैत्र मास में आती है। यह तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है और इस दिन किए गए श्राद्ध-तर्पण से उन्हें शांति मिलती है। साल 2026 में चैत्र अमावस्या 18 मार्च, बुधवार को पड़ रही है, जो आध्यात्मिक उन्नति और पूर्वजों के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ संयोग है।

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चैत्र अमावस्या 2026: पितरों को शांति दिलाने का महापर्व

चैत्र अमावस्या का दिन पितृ दोष से मुक्ति पाने और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है, जिससे न केवल शरीर शुद्ध होता है बल्कि आत्मा को भी शांति मिलती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

चैत्र अमावस्या पर क्या करें और क्या न करें?

क्या करें:

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिले पानी से स्नान करें।
  • स्नान के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करें। अपने पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं या यथाशक्ति दान दें।
  • पीपल के वृक्ष की पूजा करें और दीपक जलाएं।
  • शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए भी यह दिन उत्तम माना जाता है।

क्या न करें:

  • चैत्र अमावस्या के दिन किसी भी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि से बचें।
  • नए व्यवसाय या किसी महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत न करें।
  • तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • नकारात्मक विचारों से दूर रहें और क्रोध से बचें।
  • यात्रा करने से बचें, जब तक कि वह बहुत आवश्यक न हो।

चैत्र अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्त

अवसरतिथिदिन
चैत्र अमावस्या 202618 मार्च 2026बुधवार
स्नान-दानसूर्योदय से सूर्यास्तपूरे दिन
पितृ तर्पणदोपहरशुभ समय

पितृ शांति मंत्र

ॐ सर्व पितृ देवाय नमो नमः।

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चैत्र अमावस्या का यह पावन दिन हमें अपने पूर्वजों को स्मरण करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए कर्मों से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि परिवार में सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास भी होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यदि कोई व्यक्ति पितृ दोष से पीड़ित है, तो चैत्र अमावस्या पर विधिवत तर्पण और दान-पुण्य करने से इस दोष से मुक्ति मिल सकती है।

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