Bihar Makhana Export: कृषि निर्यात के क्षेत्र में बिहार ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पहली बार जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की व्यावसायिक खेप पूर्णिया से ग्रीस के लिए रवाना की गई है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से यह संभव हो पाया है। बुधवार को कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ऑनलाइन माध्यम से इस खेप को हरी झंडी दिखाई।
इस ऐतिहासिक अवसर पर कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने बताया कि देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 80 से 85 प्रतिशत है, जो इसे मखाना उत्पादन का गढ़ बनाता है। उन्होंने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने 7,200 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और इसके मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्यात 20 से अधिक देशों को किया, जिससे करीब 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई। अमेरिका, मध्य-पूर्व और अफ्रीका सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाना की मांग लगातार बढ़ रही है।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, ‘इस वर्ष जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की खेप अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अब ग्रीस तक पहुंची है। पहली बार बिहटा स्थित बियाडा औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई। गुणवत्ता, जीआई पहचान और बेहतर बाजार संपर्क से किसानों के लिए आय के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया गया है। यह बोर्ड मखाना किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बिहार में मखाना का उत्पादन क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है, जिससे इसके मूल्यवर्धन और निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं।
बिहार में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ‘एक्सपोर्ट पैक हाउस’
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बिहार में एक्सपोर्ट पैक हाउस का निर्माण किया गया है। यह सुविधा कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पैकेजिंग सहित निर्यात से जुड़ी सभी आवश्यक सुविधाएं यहां उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे वैश्विक बाजार में बिहार के उत्पादों की पहुंच आसान होगी।
यह पहल बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी, जिससे न केवल मखाना किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। भविष्य में बिहार के और भी कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की उम्मीद है।








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