
पटना से बड़ी खबर है, जहां अतिक्रमण हटाने के खिलाफ भारी बवाल हुआ है। रेलवे पुलिस की ओर से दुकानों को जबरन खाली कराने को लेकर दुकानदार आक्रोशित हो गए। दो दुकानदारों ने खुद को आग लगा लिया। देखते ही देखते मामले ने तूल पकड़ लिया। पुलिस और आम लोगों के बीच जमकर पथराव हुआ है। पथराव में कई लोग घायल हो गए हैं। लोगों के गुस्से को देखते हुए रेल पुलिस के जवान जान बचाकर मौके से फरार हो गए। घटना पटना सिटी के गुलजारबाग इलाके की है। पढ़िए पूरी खबर
जानकरी के अनुसार, मामला पटना सिटी क्षेत्र के गुलजारबाग स्टेशन के आगे मेहंदी गंज गुमटी के पास का है जहां प्रशासन और पब्लिक में जमकर भिड़ंत हो गई। मामला मेहंदी गंज गुमटी के पास 3 तल्ले के एक मकान निर्माण से जुड़ा है जहां कई दुकानें बनी हुई हैं।
कहा जा रहा है यह मकान अतिक्रमण कर बनाया गया है। अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन और दंडाधिकारी वहां पहुंचे। इस दौरान वहां के मौजुद लोग और प्रशासन के लोगों में जमकर झड़प हो गई। दो लोगों ने विरोध करते हुए अपने दुकान और खुद आग लगा लिया। जिसके बाद अन्य लोगों ने कार्रवाई पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी कर उन्हें वहां से खदेड़ दिया।
दरअसल, पटना सिटी के आलमगंज थाना क्षेत्र के मेहंदीगंज गुमटी के पास रेलवे प्रशासन की ओर से जबरन दुकान खाली कराने पर स्थानीय दुकानदार आक्रोशित हैं। रेलवे की इस कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय दुकानदार धरना दे रहे थे, तभी रेल पुलिस जेसीबी लेकर मौके पर पहुंची और दुकानदारों को हटाते हुए दुकानों को खाली कराने लगी। दुकान को खाली होता देख दो दुकानदारों ने आत्मदाह की कोशिश की और खुद को आग लगा लिया।
देखते ही देखते दुकानदानों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया और पूरा इलाका रणक्षेत्र में बदल गया। लोगों के गुस्से को देखते हुए रेल पुलिस के जवान और अधिकारी मौके से भाग खड़े हुए। स्थानीय लोगों ने आनन फानन में दोनों दुकानदारों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां दोनों की हालत नाजुक बनी हुई है।
दरअसल पुलिस की टीम गुलजारबाग रेलवे स्टेशन के मेहंदीगंज रेलवे गुमटी के पास अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। इस दौरान एक दुकान में अचानक से आग लगी जिसमें अनिल कुमार और मुन्ना कुमार भी बुरी तरह से झुलस गए। उन्हें पास के ही एक नर्सिंग होम में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। गुस्साए लोगों ने जेसीबी लेकर अतिक्रमण हटाने पहुंचे पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी करना शुरू कर दिया। जिस कारण पुलिसकर्मियों को को बिना कार्रवाई किए ही वहां से वापस जाना पड़ा।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि जमीन उनकी है और 40 वर्षो से वे इस जमीन पर दुकान चला रहे हैं। रेल प्रशासन उक्त जमीन को रेलवे की बताकर जमीन पर कब्जा करना चाह रही है। जबकि हाईकोर्ट में इसका मामला चल रहा है। दुकानदारों का कहना है कि रेलवे कोर्ट के फैसला के पहले ही साजिश कर जमीन कब्जा करना चाह रही है।
पीड़ित के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने ही आग लगाई है। दुकानदारों का कहना है की रेलवे के पास ऐसा कोई आदेश नहीं है की दर्जनों दुकानों को तोड़े। हालांकि लोगों के द्वारा रेलवे से कार्रवाई की आदेश की प्रति मांगी गई तो रेलवे पुलिस ने दिखाने से साफ इनकार कर दिया। फिलहाल माहौल अभी भी गर्म है। ऐसा बताया जा रहा है कि इस जगह पर अतिक्रमण को लेकर मामला कोर्ट में है और फैसला 24 फरवरी को सुनाया जाना है।







