भारत सरकार देश के बढ़ते औद्योगिक और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्षेत्रों की कच्चे माल पर निर्भरता कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। अगर सबकुछ योजना के अनुसार रहा तो बजट 2026-27 में एक नई और दूरदर्शी खनन नीति (Mining Policy) पेश की जा सकती है, जिसका प्राथमिक लक्ष्य आयात को घटाकर चांदी, तांबा और जस्ता जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना है। यह नीति पिछले साल के खनन सुधारों को आगे बढ़ाएगी और देश को आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी। एक समय तांबे का शुद्ध निर्यातक रहा भारत आज सालाना 5-7 बिलियन डॉलर का तांबा आयात करता है, ऐसे में यह नीति विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाती है।
भारत की खनन क्षमता को बढ़ाएगी नई माइनिंग पॉलिसी
भारत की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों की तीव्र वृद्धि ने कच्चे माल पर निर्भरता को खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है। इस चुनौती से निपटने के लिए नई माइनिंग पॉलिसी में निजी खिलाड़ियों की भूमिका को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक तांबे की गलाने की क्षमता को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 2 मिलियन टन करना है, जिससे घरेलू मांग को पूरा किया जा सके और आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

नई माइनिंग पॉलिसी: आत्मनिर्भरता की ओर कदम
नई नीति में चांदी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारत वैश्विक चांदी की मांग का 15-20% उपभोग करता है, जो इसे एक महत्वपूर्ण धातु बनाता है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा और 500 GW हरित ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के कारण धातुओं की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि होने की उम्मीद है। यह मांग केवल बढ़ेगी, जिससे घरेलू खनन और प्रसंस्करण क्षमताओं को बढ़ाना अनिवार्य हो जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
महत्वपूर्ण खनिज और भविष्य की रणनीतियाँ
- **तांबा उत्पादन लक्ष्य:** 2030 तक तांबे की गलाने की क्षमता 2 मिलियन टन तक बढ़ाना।
- **चांदी पर फोकस:** भारत की 15-20% वैश्विक खपत को देखते हुए घरेलू उत्पादन को बढ़ावा।
- **EV और हरित ऊर्जा की भूमिका:** इलेक्ट्रिक वाहन और 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य से धातुओं की मांग में वृद्धि।
- **निजी क्षेत्र की भागीदारी:** खनन क्षेत्र में निजी निवेश और विशेषज्ञता को आकर्षित करना।
सरकार 2026 में 20-30 क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) ब्लॉकों की नीलामी करने की भी योजना बना रही है। इसमें दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Rare Earths) भी शामिल होंगे, जो उच्च तकनीक वाले उद्योगों और रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन खनिजों की घरेलू उपलब्धता से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत होगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता आएगी। यह कदम भारत को वैश्विक बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह नीति केवल आयात कम करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक स्थायी और कुशल खनन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना भी है जो पर्यावरण मानकों का पालन करते हुए आर्थिक विकास को बढ़ावा दे। इस नीति से देश के खनिज संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बाजार पर संभावित प्रभाव
यह नीति धातु क्षेत्र में भारी निवेश को आकर्षित कर सकती है, जिससे नई खदानें खुलेंगी और मौजूदा खदानों का विस्तार होगा। इससे संबंधित उद्योगों जैसे विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा मिलेगा। निवेशकों के लिए, यह एक ऐसा अवसर हो सकता है जहां घरेलू आपूर्ति बढ़ने से लागत कम हो सकती है और भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकता है।







