
Digital Fraud: तेजी से बढ़ते डिजिटल लेन-देन के युग में, जहां एक ओर सुविधा का नया दौर शुरू हुआ है, वहीं दूसरी ओर साइबर धोखाधड़ी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। भारत, जो कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहां ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे न केवल व्यक्तियों को वित्तीय नुकसान होता है बल्कि डिजिटल भुगतान प्रणाली पर उनका भरोसा भी डगमगाता है। इसी गंभीर समस्या से निपटने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अब एक ठोस और निर्णायक कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक एक ऐसी व्यापक रूपरेखा तैयार कर रहा है जिसके तहत डिजिटल धोखाधड़ी के शिकार ग्राहकों को मुआवजा मिल सकेगा, जिससे उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी और डिजिटल इकोसिस्टम में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
Digital Fraud: अब ग्राहकों को मिलेगा 25,000 रुपये तक का मुआवजा – RBI की नई सुरक्षा कवच योजना!
Digital Fraud से पीड़ितों के लिए RBI का ऐतिहासिक कदम
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में घोषणा की है कि छोटे-मोटे धोखाधड़ी वाले डिजिटल लेन-देन से हुए नुकसान की भरपाई के लिए ग्राहकों को 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति देने की एक नई रूपरेखा लाई जाएगी। चालू वित्त वर्ष की आखिरी मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल भुगतान की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आरबीआई एक ड्राफ्ट भी जारी करेगा। इस ड्राफ्ट में विलंब से क्रेडिट जैसी व्यवस्थाओं और वरिष्ठ नागरिकों जैसे विशेष वर्ग के उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण उपायों पर विचार किया जाएगा। विलंब से क्रेडिट का अर्थ कुछ डिजिटल लेन-देन से प्राप्त राशि को जानबूझकर थोड़ी देरी से प्राप्तकर्ता के खाते में जमा करना है, ताकि धोखाधड़ी की आशंका को कम किया जा सके। यह पहल सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए आरबीआई तीन नए दिशानिर्देशों का मसौदा जारी करेगा। इनमें पहला वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की गलत बिक्री से जुड़ा होगा, दूसरा अनधिकृत डिजिटल लेन-देन में ग्राहकों की देनदारी को सीमित करने से संबंधित होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। साथ ही, तीसरा कर्ज वसूली और वसूली एजेंटों की नियुक्ति और उनके तौर-तरीकों से जुड़ा होगा। उन्होंने कहा कि कम वैल्यू के ट्रांजेक्शंस में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए प्रस्तावित रूपरेखा भी इन्हीं संशोधित निर्देशों का हिस्सा होगी। गौर करने वाली बात यह है कि अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शंस में कस्टमर्स की शून्य या सीमित देनदारी से जुड़े मौजूदा निर्देश साल 2017 में जारी किए गए थे, जिनकी अब तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए समीक्षा की गई है।
ग्राहकों के हितों की सुरक्षा और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा
मल्होत्रा ने बताया कि वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की गलत बिक्री से ग्राहकों के साथ-साथ वित्तीय संस्थानों को भी गंभीर नुकसान होता है। इसलिए, यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि बैंक काउंटर पर बेचे जाने वाले तीसरे-पक्ष उत्पाद ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों और उनकी जोखिम लेने की क्षमता के अनुरूप हों। इसी उद्देश्य से विज्ञापन, विपणन और बिक्री से जुड़े व्यापक निर्देशों का मसौदा भी सार्वजनिक परामर्श के लिए जल्द ही जारी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, बैंकों और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) में कर्ज वसूली और वसूली एजेंटों से जुड़े अलग-अलग नियमों की समीक्षा कर उनमें एकरूपता लाने का भी फैसला किया गया है।
इसके साथ ही, आरबीआई गवर्नर ने ‘मिशन सक्षम’ की भी घोषणा की, जिसका प्राथमिक उद्देश्य शहरी सहकारी बैंकों की क्षमता निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक शहरी सहकारी बैंक वित्तीय समावेशन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनकी भविष्य की वृद्धि मजबूत कौशल, तकनीकी क्षमताओं और परिचालन मजबूती पर निर्भर करती है। मिशन सक्षम के तहत क्षेत्र-व्यापी क्षमता निर्माण और प्रमाणन ढांचा तैयार किया जाएगा, जिसे बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों और एक व्यापक लर्निंग प्लेटफॉर्म के जरिए लागू किया जाएगा। इसमें विभिन्न कार्यों से जुड़े लगभग 14 लाख प्रतिभागियों को शामिल किया जाएगा, और प्रशिक्षण कार्यक्रम यथासंभव स्थानीय स्थानों व क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित किए जाएंगे। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/business/ आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



