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चैती छठ 2026: नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक, जानें संपूर्ण विधि और महत्व

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Chaiti Chhath 2026: आत्म-शुद्धि और लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 2026 नहाय-खाय के साथ आरंभ होने जा रहा है, जो भक्तों को सूर्य देव की उपासना और छठी मैया के आशीर्वाद से जोड़ने का अनुपम अवसर प्रदान करेगा। यह चार दिवसीय अनुष्ठान अत्यंत पवित्रता और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

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चैती छठ 2026: नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक, जानें संपूर्ण विधि और महत्व

चैती छठ 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां और व्रत का संकल्प

चैती छठ 2026: भारतीय संस्कृति में चैती छठ का विशेष महत्व है, यह पर्व संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना के लिए रखा जाता है। यह कठोर तपस्या और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दौरान व्रतीजन निर्जला उपवास रखते हुए भगवान सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना करते हैं। चैती छठ का प्रत्येक दिन अपने आप में विशिष्ट अनुष्ठानों और परंपराओं से ओत-प्रोत होता है, जिसकी विस्तृत जानकारी हम यहां प्रदान कर रहे हैं।

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चैती छठ पर्व की विस्तृत तिथियां और पूजन विधि

चैती छठ का पावन पर्व चार दिनों तक चलता है, जिसमें प्रत्येक दिन का अपना एक विशेष अनुष्ठान और महत्व होता है।

  • **पहला दिन: नहाय-खाय (22 मार्च 2026, शनिवार)**
    • इस दिन व्रती स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं।
    • घरों की साफ-सफाई की जाती है।
    • कद्दू-भात या चने की दाल, लौकी की सब्जी और चावल का शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।
    • नहाय-खाय के साथ ही छठ पर्व का विधिपूर्वक संकल्प लिया जाता है।
  • **दूसरा दिन: खरना (23 मार्च 2026, रविवार)**
    • खरना के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं।
    • शाम को गुड़ और चावल की खीर, पूड़ी व फलों का भोग तैयार किया जाता है।
    • सूर्यदेव की पूजा के बाद यही प्रसाद ग्रहण किया जाता है, जिसे ‘खरना’ कहा जाता है।
    • खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद से 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।
  • **तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (24 मार्च 2026, सोमवार)**
    • इस दिन व्रती पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
    • बांस की टोकरी में मौसमी फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू (कसार), गन्ना, सिंघाड़ा आदि प्रसाद सजाया जाता है।
    • सभी व्रती और श्रद्धालु नदी या तालाब के किनारे एकत्रित होकर सूर्य देव की उपासना करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
    • अर्घ्य के समय दूध और जल से सूर्य को अर्पण किया जाता है।
  • **चौथा दिन: उषा अर्घ्य (25 मार्च 2026, मंगलवार)**
    • चैती छठ का अंतिम दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होता है।
    • व्रती और श्रद्धालु पुनः घाट पर एकत्रित होकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
    • अर्घ्य देने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर पारण करते हैं और अपना व्रत तोड़ते हैं।
    • इस दिन छठी मैया और सूर्यदेव से सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

चैती छठ 2026: शुभ मुहूर्त

**तिथि****दिन****सूर्योदय (अनुमानित)****सूर्यास्त (अनुमानित)****महत्वपूर्ण कार्य**
22 मार्च 2026शनिवारसुबह 06:15शाम 06:20नहाय-खाय
23 मार्च 2026रविवारसुबह 06:14शाम 06:21खरना
24 मार्च 2026सोमवारसुबह 06:13शाम 06:21संध्या अर्घ्य
25 मार्च 2026मंगलवारसुबह 06:12शाम 06:22उषा अर्घ्य

**नोट:** सूर्योदय और सूर्यास्त का समय आपके स्थानीय क्षेत्र के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।

सूर्यदेव की उपासना का महामंत्र

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।
ॐ घृणि सूर्याय नमः।

यह मंत्र सूर्यदेव की कृपा प्राप्त करने और व्रत को सफल बनाने में सहायक होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

चैती छठ का धार्मिक महत्व और उपाय

चैती छठ का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और ऊर्जा के सबसे बड़े स्रोत सूर्यदेव के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का महापर्व है। यह व्रत शारीरिक और मानसिक शुद्धता के साथ-साथ परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दौरान किए गए उपाय और दान-पुण्य से समस्त कष्टों का निवारण होता है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। चैती छठ व्रत के दौरान पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है और घर के सभी सदस्य इस अनुष्ठान में अपनी भूमिका निभाते हैं। यह पर्व हमें त्याग, तपस्या और प्रकृति के सम्मान का संदेश देता।

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