

Makar Sankranti 2026: सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश का पावन पर्व मकर संक्रांति इस वर्ष बड़े ही भक्तिभाव और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन स्नान-दान और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।
# Makar Sankranti 2026: स्नान-दान और शुभ कार्यों का महा पर्व
## Makar Sankranti 2026 का धार्मिक महत्व और पुण्यकाल
हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जिसके साथ ही खरमास का समापन होता है और सभी प्रकार के शुभ कार्यों, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि की शुरुआत हो जाती है। यह त्योहार सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। दान करने से कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान सीधे देवताओं तक पहुँचता है। इस विशेष पर्व पर दान-पुण्य का महत्व और भी बढ़ जाता है, खासकर जब यह शुभ मुहूर्त में किया जाए।
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्यदेव अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। पिता-पुत्र का यह मिलन ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र और कंबल दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
**मकर संक्रांति 2026: शुभ मुहूर्त**
| कर्म | समय |
| :———— | :———— |
| मकर संक्रांति स्नान | सुबह 07:15 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक |
| महापुण्यकाल | सुबह 07:15 बजे से सुबह 09:15 बजे तक |
| पुण्यकाल | सुबह 07:15 बजे से शाम 05:46 बजे तक |
**पूजा विधि**
* प्रातःकाल उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि यह संभव न हो तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
* स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्यदेव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।
* तिल, गुड़, चावल, दाल, खिचड़ी, वस्त्र, कंबल आदि का दान करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
* इस दिन पितरों का तर्पण करने का भी विधान है।
* भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें।
**धार्मिक संदर्भ और कथा**
मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी के तट पर स्नान का विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन गंगा नदी कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में मिली थीं, जहां राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ था। भीष्म पितामह ने भी इसी दिन अपनी देह का त्याग किया था। इस दिन किए गए स्नान-दान से मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति होती है।
> ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्।
**निष्कर्ष और उपाय**
मकर संक्रांति का यह पावन पर्व हमें दान, धर्म और आस्था के महत्व को दर्शाता है। इस दिन किया गया दान-पुण्य न केवल हमारे जीवन में सुख-समृद्धि लाता है बल्कि हमें आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी अग्रसर करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन तिल का सेवन और दान करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है और सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं।
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