Bihar Flood Alert: भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल में गंगा और कोसी नदियों का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। बुधवार को दर्ज की गई इस वृद्धि से आस-पास के इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदियों के बढ़ते पानी ने तटबंधों पर दबाव काफी बढ़ा दिया है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता है।
जल संसाधन विभाग की 19 अगस्त की सुबह छह बजे की रिपोर्ट के अनुसार, कई स्थानों पर नदियों का पानी तटबंध के निचले हिस्से को छू रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए विभाग ने सभी प्रमुख तटबंधों पर चौबीसों घंटे निगरानी बढ़ा दी है।
भागलपुर: गंगा-कोसी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, नवगछिया में मंडराया बाढ़ का खतरा! जानें ताजा अपडेट
Bihar Flood: भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल में गंगा और कोसी नदियों का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। बुधवार, 19 अगस्त को सुबह छह बजे तक की रिपोर्ट के अनुसार, नदियों के इस उग्र रूप ने तटबंधों पर भारी दबाव बढ़ा दिया है, जिससे आस-पास के इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जल संसाधन विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रमुख तटबंधों पर चौबीसों घंटे निगरानी बढ़ा दी है।
गंगा का जलस्तर बढ़ा, कई स्थानों पर खतरे के करीब
गंगा नदी का सर्वाधिक दबाव इस्माईलपुर-बिंद टोली में देखा जा रहा है। यहाँ स्पर संख्या-7 पर गंगा का जलस्तर 30.75 मीटर दर्ज किया गया है, जो चेतावनी स्तर से 15 सेंटीमीटर ऊपर है। पिछले 24 घंटे में इस बिंदु पर नदी के जलस्तर में 22 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। हालाँकि, खतरे का स्तर 31.60 मीटर निर्धारित है और जल संसाधन विभाग ने फिलहाल तटबंध को सुरक्षित बताया है।
काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध के पास गंगा के जलस्तर में सबसे तेज उछाल आया है। यहाँ पिछले 24 घंटे के भीतर रिकॉर्ड 40 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे जलस्तर 31.92 मीटर पर पहुँच गया है। इस स्थान पर चेतावनी स्तर 32.68 मीटर है, जबकि खतरे का स्तर 33.68 मीटर है। नदी का पानी यहाँ भी तटबंध के निचले हिस्से को छू रहा है।
कोसी नदी भी दिखा रही तेवर, बांधों पर दबाव
वहीं दूसरी ओर, कोसी नदी भी अपने तेवर दिखा रही है। जेबी चोरहर में कोसी का जलस्तर 10 सेंटीमीटर बढ़कर 30.60 मीटर पर पहुँच गया है, जो चेतावनी स्तर से महज 17 सेंटीमीटर नीचे है। यहाँ बागजान जमींदारी बांध के कई हिस्सों में नदी का पानी तटबंध के ‘टो’ को छू रहा है।
मदरौनी में भी कोसी का जलस्तर 8 सेंटीमीटर की वृद्धि के साथ 30.03 मीटर दर्ज किया गया है। यहाँ चेतावनी स्तर 30.48 मीटर है। चारों प्रमुख संवेदनशील स्थलों के आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार में बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
सुरक्षा का दावा, पर निगरानी जारी
जल संसाधन विभाग के अभियंता और अधिकारियों की टीम लगातार तटबंधों की स्थिति पर पैनी नजर रख रही है। विभाग का कहना है कि भले ही पानी तटबंधों के ‘टो’ को छू रहा है, लेकिन सभी बांध और स्पर फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित हैं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। हालांकि, नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर ने स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर के ऊपर, 40 सेंटीमीटर की रिकॉर्ड वृद्धि
इस्माईलपुर-बिंद टोली में गंगा नदी पर सबसे अधिक दबाव देखा जा रहा है। यहाँ स्पर संख्या-7 पर गंगा का जलस्तर 30.75 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर से 15 सेंटीमीटर ऊपर है। पिछले 24 घंटे में इस स्थान पर 22 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। हालांकि, खतरे का स्तर 31.60 मीटर निर्धारित है और जल संसाधन विभाग ने फिलहाल तटबंध को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।
काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध के समीप गंगा के जलस्तर में रिकॉर्ड उछाल आया है। पिछले 24 घंटे के भीतर यहाँ 40 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे जलस्तर 31.92 मीटर पर पहुँच गया है। इस स्थान पर चेतावनी स्तर 32.68 मीटर और खतरे का स्तर 33.68 मीटर है। यहाँ भी नदी का पानी तटबंध के निचले हिस्से को छू रहा है।
कोसी में भी लगातार बढ़ोतरी, कई तटबंधों के करीब पहुंचा पानी
जेबी चोरहर में कोसी नदी का जलस्तर 10 सेंटीमीटर बढ़कर 30.60 मीटर पर पहुँच गया है। यह चेतावनी स्तर से महज 17 सेंटीमीटर नीचे है। यहाँ बागजान जमींदारी बांध के कई हिस्सों में नदी का पानी तटबंध के ‘टो’ को छू रहा है।
मदरौनी में भी कोसी का जलस्तर 8 सेंटीमीटर की वृद्धि के साथ 30.03 मीटर दर्ज किया गया है। यहाँ चेतावनी स्तर 30.48 मीटर है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार में बाढ़ का खतरा लगातार गहराता जा रहा है।
जल संसाधन विभाग का दावा: स्थिति नियंत्रण में, लेकिन निगरानी जारी
जल संसाधन विभाग के अभियंता और अधिकारियों की टीम लगातार संवेदनशील तटबंधों की स्थिति पर नजर रख रही है। विभाग ने आधिकारिक बयान में कहा है:
“पानी भले ही तटबंधों के टो को छू रहा है, लेकिन सभी बांध और स्पर फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित हैं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।”
हालांकि, चार प्रमुख संवेदनशील स्थलों पर जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि स्थानीय प्रशासन और जनता दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर पर कड़ी निगरानी बनाए रखना आवश्यक होगा, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।








