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मार्च, 11, 2026
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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद: बस्तर में अमन की आहट, सरकार ने तय की नक्सल खात्मे की डेडलाइन!

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कठोर चट्टानों पर जमी बर्फ भी एक दिन पिघलती है, उसी तरह दशकों से छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल को जकड़े आतंक की बर्फ भी अब पिघलने वाली है। सरकार ने इसके खात्मे का बिगुल फूंक दिया है, समय सीमा तय कर दी गई है। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद: दशकों से खूनी संघर्ष का गवाह रहा बस्तर अंचल अब शांति की नई सुबह देखने को तैयार है, क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार ने सशस्त्र नक्सलवाद को जड़ से मिटाने की एक निर्णायक समय सीमा तय कर दी है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मंगलवार को विधानसभा में गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान यह महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य से 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद का पूरी तरह से सफाया कर दिया जाएगा। इसके ठीक एक साल बाद, यानी 31 मार्च 2027 तक बस्तर में तैनात अधिकांश केंद्रीय बलों की वापसी सुनिश्चित की जाएगी। यह खबर उन लाखों लोगों के लिए सुकून लेकर आई है, जो हिंसा और भय के साये में जी रहे थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद: खात्मे का ब्लू प्रिंट तैयार!

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शर्मा ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि, “जब 31 मार्च 2026 को सशस्त्र नक्सलवाद के समापन की तिथि तय की गई, तभी यह भी निर्णय लिया गया था कि 31 मार्च 2027 तक यहां तैनात केंद्रीय बलों की वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। कुछ बल उससे पहले भी वापस जा सकते हैं। हमारी बैठकों में इस बात पर सहमति बनी है कि 31 मार्च 2027 को हम एक निश्चित समय सीमा मानकर चलें, हालांकि इसमें थोड़ा आगे-पीछे होना संभव है।” इस घोषणा के साथ, सरकार ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी है।

बस्तर में सुरक्षा और विकास की नई इबारत

पुलिस विभाग के बजट पर प्रकाश डालते हुए उपमुख्यमंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 7,721.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। नक्सली कैडरों के पुनर्वास के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। केंद्र की पुनर्वास नीति के तहत सावधि जमा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए 38 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह कदम उन लोगों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर देगा जो भटक कर वामपंथी उग्रवाद का हिस्सा बन गए थे।

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सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। नक्सल प्रभावित जिलों में 15 नए थानों की स्थापना की जाएगी, जिसके लिए 975 नए पदों का सृजन होगा। इसके अतिरिक्त, आठ पुलिस चौकियों को थानों में उन्नत करने के लिए 337 नए पद और कम स्वीकृत बल वाले 21 थानों में अतिरिक्त बल वृद्धि के लिए 870 नए पदों का प्रावधान किया गया है। राज्य की 16 जेलों में ‘प्रिजन कॉलिंग सिस्टम’ स्थापित करने के लिए 1.05 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिससे बंदी अपने परिजनों और अधिवक्ताओं से वॉयस या वीडियो कॉल के माध्यम से बात कर सकेंगे। यह एक मानवीय पहल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने भी नक्सलवाद के खात्मे की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हर कोई चाहता है कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो। उन्होंने सरकार के 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने के दावे पर कहा, “31 मार्च में अब केवल 21 दिन शेष हैं। हमें उम्मीद है कि इसके बाद अर्धसैनिक बलों की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।” बघेल ने सुझाव दिया कि नक्सलवाद के समाप्त होने पर 31 मार्च को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर जश्न मनाया जाना चाहिए और बस्तर के विकास का लाभ मुख्य रूप से स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

चर्चा के उपरांत, बघेल ने कटौती प्रस्ताव पर मत विभाजन की मांग की, जो बजट में किसी विशेष मांग की राशि को कम करने की एक विधायी प्रक्रिया है। प्रस्ताव के विरोध में 37 और पक्ष में 24 मत पड़े, जिसके बाद कटौती प्रस्ताव निरस्त हो गया। अंततः, सदन ने उपमुख्यमंत्री शर्मा के विभागों की अनुदान मांगों को मंजूरी दे दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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