
होमगार्ड डीजी शोभा ओहोतकर और आईजी विकास वैभव के बीच विवाद अब पत्र तक पहुंच गया है। जान को खतरे तक पहुंच गया है। मामला पूरी तरह उलझ गया है। आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ने अब होमगार्ड आईजी के पद से कार्यमुक्ति की बात कही है। इसके लिए उन्होंने बाजावता सरकार को अवगत कराते हुए गृह विभाग से गुहार भी लगाई है। पत्र गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद को भी भेजा है।
सोमवार को आइजी विकास वैभव ने गृह विभाग को इस संबंध में एक पत्र लिखकर ट्रांसफर की अपील की है। उन्होंने पत्र में लिखा कि मैं कई महीनों से प्रताड़ित हूं। मैं और मेरा परिवार मानसिक तौर पर बेहद परेशान है। मुझे दूसरे विभाग में भेजा जाए। वर्तमान विभाग में एक दिन भी काम करना खतरे से खाली नहीं। वहां अप्रिय घटना भी हो सकती है। विकास वैभव ने विभाग नहीं बदलने पर अवकाश की मांग की है।
इस पत्र में विकास वैभव ने खुलकर डीजी शोभा अहोतकर से खुद को खतरा महसूस करने की बात कही है। साथ ही गृह रक्षा वाहिनी आईजी पद से स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र जारी होते ही प्रशासनिक समेत राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।
आइजी विकास वैभव ने इस पत्र में लिखा है कि डीजी शोभा अहोटकर जबरन दंडित करने की मंशा से बिहारी और पत्नी के नाम से गाली देती हैं। उनके साथ काम करने में वह खतरा महसूस करते हैं। विकास वैभव ने लिखा कि कार्यस्थल पर मेरे साथ अप्रिय घटनाएं घट सकती हैं, क्षति पहुंचाई जा सकती है। ऐसे वरीय पदाधिकारी के अधीन कर्तव्य पालन संभव और सुरक्षित नहीं है।
जानकारी के अनुसार, आईजी विकास वैभव ने पूर्व स्वीकृत अवकाश से लौटते ही डीजी शोभा अहोटकर के आसपास रहने से खुद और परिवार को खतरा बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उस तीखी सलाह का भी जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने ऐसी शिकायतें उचित फोरम पर रखने कहा था, न कि ट्वीट करने।
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को आइपीएस विकास वैभव की ओर से मिली चिट्ठी में साफ तौर पर बताया गया है कि उन्होंने डीजी शोभा अहोटकर की गालीबाजी की शिकायत न केवल सितंबर 2022 से कई बार की, बल्कि उनके साथ कई अन्य पदाधिकारी भी डीजी से बचाने की गुहार लेकर गृह विभाग के चक्कर लगा चुके हैं।
गृह विभाग को मिली इस चिट्ठी में तारीखों के साथ शिकायतों की जानकारी है। उन्होंने पूरी जानकारी देते हुए डीजी शोभा अहोटकर के मातहत काम करने में असमर्थता और डर दिखाते हुए अन्यत्र ट्रांसफर की मांग की है और ऐसा तत्काल नहीं होने की स्थिति में दो महीने के उस अवकाश को स्वीकृत करने की गुहार लगाई है, जो वह पहले से दे चुके हैं।
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को भेजे गये पत्र में विकास वैभव ने लिखा है कि उपर्युक्त विषय के संबंध में सादर अनुरोधपूर्वक कहना है कि ज्ञापांक-111/ गो., दिनांक 10.02.2023 के माध्यम से महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा महोदया (गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएं, बिहार, पटना) ने मेरे विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने से संबंधित पत्र लिखा है, जिसकी जानकारी मुझे गृह विभाग की ओर से प्रेषित पत्र (ज्ञापांक- 2074, दिनांक- 11.02. 2023) से प्राप्त हुई है और मुझे सात दिनों के अन्दर अपना स्पष्टीकरण समर्पित करने के लिए कहा गया है। इस संबंध में मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि निर्धारित अवधि में मैं अपना स्पष्टीकरण महोदय के समक्ष सभी कंडिकाओं के संबंध में आवश्यक विवरण के साथ उपलब्ध कराऊंगा।
जानकारी के अनुसार, विकास वैभव ने कहा है कि वह मानसिक प्रताड़ना महसूस कर रहे हैं। वर्तमान पद से मुक्ति ही इसका समाधान है। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद को पत्र लिखकर विकास वैभव ने अनुरोध किया है कि मेरा अब उनके (शोभा ओहोटकर) नियंत्रण में कार्य करना गंभीर खतरे की घंटी से कम नहीं है।
आशंका है कि वहां कार्यरत्त रहने पर ऑफिस में ही मेरे साथ अप्रिय घटना घट सकती है या फिर ऐसी क्षति पहुंचाई जा सकती है जो मेरे लिए अपूरणीय हो। ऐसे में अब एक दिन भी वरीय पदाधिकारी के अधीन कार्यरत रहना संभव एवं सुरक्षित नहीं है।
इन विशेष परिस्थिति के मद्देनजर मेरे निर्दोष पारिवारिक सदस्यों की सुरक्षा पर विचार किया जाय. साथ ही अस्थाई तौर पर उक्त वरीय पदाधिकारी के नियंत्रण से मुक्त कर किसी अन्य पद पर पदस्थापित करने को लेकर राज्य सरकार की स्वीकृति ली जाए।
उन्होंने आगे लिखा कि यदि राज्य सरकार के लिए यह वैकल्पिक व्यवस्था संभव नहीं हो तो तेरह फरवरी से उपार्जित अवकाश में जाने की अनुमति दी जाए। विकास वैभव ने आग्रह किया है कि वे कई महीनों से मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।
ऐसे में संभव हो तो स्पष्टीकरण समर्पित करने की अवधि सात दिनों से बढ़ाकर चौदह दिन की जाए। विकास वैभव ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि गृह विभाग का पत्र 11 फरवरी को मिला, जिसमें मेरे विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई किए जाने के संबंध में जानकारी हुई। मुझे सात दिनों के अंदर स्पष्टीकरण समर्पित करने को कहा गया। उस अवधि को 14 दिन किया जाय।






